चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: चंडीगढ़ की एक अदालत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबंध में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर कथित रूप से भ्रामक और आपत्तिजनक सामग्री साझा करने के आरोपी हैदराबाद निवासी 42 वर्षीय हसन मोहिउद्दीन सिद्दीकी की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि संबंधित पोस्ट प्रधानमंत्री की गरिमा पर "क्रूर हमला" है और ऐसे मामलों में बिना जांच पूरी हुए राहत देना न्यायहित में नहीं होगा।
सिद्दीकी को 25 अप्रैल को चंडीगढ़ के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज एक एफआईआर के आधार पर गिरफ्तार किया गया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी ने अपने एक्स अकाउंट के माध्यम से प्रधानमंत्री से जुड़ी भ्रामक और विवादास्पद जानकारी प्रसारित की, जिसका उद्देश्य उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना था। साथ ही आरोप है कि इस सामग्री से सामाजिक वैमनस्य फैलने और सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका भी थी।
बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि आरोपी ने कोई मॉर्फ्ड वीडियो साझा नहीं किया और न ही कोई मानहानिकारक टिप्पणी की। उनका कहना था कि सिद्दीकी ने केवल एक्स के एआई टूल ‘ग्रोक’ से एक वीडियो की सत्यता को लेकर सवाल पूछा था। वहीं, अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि आरोपी ने बिना किसी ठोस आधार के भ्रामक जानकारी प्रसारित की और यह कृत्य प्रधानमंत्री की छवि को नुकसान पहुंचाने की मंशा से किया गया।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रोहित वॉट्स ने अपने आदेश में कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एक मौलिक अधिकार है, लेकिन यह पूर्णतः असीमित नहीं है और इसके साथ जिम्मेदारियां भी जुड़ी होती हैं। अदालत ने कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों की आलोचना की जा सकती है, लेकिन वह आलोचना मानहानि या सार्वजनिक शरारत फैलाने की सीमा में नहीं जानी चाहिए। जांच अभी जारी होने का हवाला देते हुए अदालत ने जमानत याचिका खारिज कर दी और स्पष्ट किया कि आदेश में की गई टिप्पणियां केवल जमानत पर निर्णय के लिए हैं, न कि मामले के अंतिम निष्कर्ष के रूप में।