चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रॉयल एस्टेट ग्रुप और चंडीगढ़ रॉयल सिटी प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड (सीआरसीपीएल) जैसी बड़ी रियल एस्टेट कंपनियों पर मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के तहत अपनी कार्रवाई बेहद तेज कर दी है। केंद्रीय जांच एजेंसी अब इन ग्रुप्स और उनसे जुड़ी कंपनियों के 18 बैंक खातों में दर्ज 286 संदिग्ध वित्तीय एंट्रीज की बारीकी से जांच कर रही है। ईडी को अंदेशा है कि इन संदिग्ध लेनदेन के जरिए आम निवेशकों की मेहनत की गाढ़ी कमाई को गैर-कानूनी ढंग से डायवर्ट (दूसरी जगह खपाना) किया गया है, जिसके लिए 'मनी ट्रेल' (पैसों के आने-जाने का जरिया) को खंगाला जा रहा है।
रियल एस्टेट कारोबारी प्रवीण कंसल भी जांच के घेरे में:
फंड डायवर्जन के संकेत: सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान कई ऐसे वित्तीय दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य मिले हैं जो इशारा करते हैं कि मोटी रकम को अलग-अलग बैंक खातों और बेनामी संपत्तियों में निवेश किया गया है।
प्रवीण कंसल का रिकॉर्ड तलब: इसी मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए ईडी ने प्रसिद्ध रियल एस्टेट कारोबारी प्रवीण कंसल उर्फ रॉकी के निजी और व्यावसायिक बैंक रिकॉर्ड को भी अपने रडार पर ले लिया है।
क्या है मुख्य मामला और धोखाधड़ी का आरोप?
यह पूरा कानूनी मामला चंडीगढ़ रॉयल सिटी प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों व अन्य प्रमोटर्स के खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy) से जुड़ा है। कंपनी पर आरोप है कि उसने ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा - GMADA) की करोड़ों रुपये की बकाया राशि को जानबूझकर दबाए रखा। इसके अलावा, सरकारी देनदारी चुकाने के नाम पर कंपनी द्वारा करीब 32.67 करोड़ रुपये के बाउंस चेक (Cheque Bounce) जारी किए गए, जो सीधे तौर पर वित्तीय धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है।
गमाडा (GMADA) के पिछले 5 वर्षों के CLU रिकॉर्ड तलब:
ईडी की जांच अब केवल बैंकिंग लेनदेन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार प्रशासनिक भ्रष्टाचार से भी जुड़ रहे हैं:
नियमों को ताक पर रखने का शक: ईडी ने गमाडा से पिछले पांच वर्षों के दौरान जारी किए गए सभी 'चेंज ऑफ लैंड यूज' (सीएलयू - CLU) मामलों का पूरा आधिकारिक रिकॉर्ड तलब कर लिया है। एजेंसी यह देख रही है कि किन बिल्डरों को नियमों को दरकिनार कर कृषि या अन्य भूमि को रिहायशी/कमर्शियल में बदलने की मंजूरी दी गई।
अधिकारियों पर गिरेगी गाज: ईडी ने उन मौजूदा और पूर्व अधिकारियों की सूची भी मांगी है जिनके कार्यकाल में ये विवादित सीएलयू मंजूर किए गए थे। संदिग्ध भूमिका वाले कई पूर्व नौकरशाहों और अफसरों को पूछताछ के लिए समन भेजने की तैयारी है।
रॉयल एस्टेट, सनटेक और अल्टस प्रोजेक्ट्स पर फोकस:
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पिछले पांच सालों में 50 से अधिक ऐसे सीएलयू जारी किए गए, जो पूरी तरह संदिग्ध हैं। आरोप हैं कि कुछ चुनिंदा बिल्डरों को एक के बाद एक कई बड़े प्रोजेक्ट्स की मंजूरियां दे दी गईं, जबकि आम आवेदकों के लिए नियमों को कड़ा रखा गया। फिलहाल ईडी का मुख्य फोकस रॉयल एस्टेट ग्रुप, सनटेक सिटी और अल्टस स्पेस बिल्डर्स की परियोजनाओं पर है। इन पर आरोप है कि इन्होंने फर्जी दस्तावेजों और जाली सहमति पत्रों (Consent Letters) के आधार पर सीएलयू हासिल किए। हाल ही में इन कंपनियों के ठिकानों पर की गई छापेमारी में भारी नकदी और आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद हुए हैं, जिसके आधार पर आने वाले दिनों में कुछ और बड़े हाउसिंग ग्रुप्स पर ईडी का शिकंजा कसना तय माना जा रहा है।