केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस साल जनवरी में 8वें वेतन आयोग को अपनी मंजूरी दे दी थी। उल्लेखनीय है कि भारत में सरकार आमतौर पर हर 10 साल में वेतन आयोग का गठन करती है। हम कह सकते हैं कि वेतन आयोग कम से कम 10 साल के लिए केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के भाग्य का फैसला करता है।
इसके अलावा, भारत की आबादी करीब 140 करोड़ है। वर्तमान में, इन 140 करोड़ में से 1 करोड़ लोग केंद्र सरकार के कर्मचारी या पूर्व कर्मचारी होने का विशेषाधिकार प्राप्त करते हैं। तत्कालीन यूपीए सरकार ने 2014 में 7वें वेतन आयोग की स्थापना की और 2016 में एनडीए सरकार ने इसे लागू किया।
वेतन आयोग का काम सिर्फ वेतन और पेंशन वृद्धि तक सीमित नहीं है। यह केंद्र सरकार के कर्मचारियों को दिए जाने वाले भत्ते और अन्य सुविधाओं का भी आकलन करता है। कई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नया वेतन आयोग 7वें वेतन आयोग में दिए गए कई पुराने और अप्रासंगिक भत्तों को पूरी तरह से खत्म कर सकता है। साथ ही, यदि आवश्यक हो तो नए वेतन आयोग में नए भत्ते शामिल किए जा सकते हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि 7वें वेतन आयोग ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए कई भत्ते भी खत्म कर दिए हैं।
100% वेतन वृद्धि और अन्य विवरण
राष्ट्रीय परिषद-संयुक्त परामर्शदात्री मशीनरी (एनसी-जेसीएम) के कर्मचारी पक्ष के नेता एम. राघवैया ने एनडीटीवी प्रॉफिट को बताया कि वे नए वेतन आयोग के तहत 'फिटमेंट फैक्टर 2' पर विचार करेंगे। इससे केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन में 100% की वृद्धि होगी।
7वें वेतन आयोग के तहत, केंद्र सरकार के कर्मचारियों का मूल वेतन वर्तमान में 18,000 रुपये प्रति माह निर्धारित है। इसके अलावा, पेंशनभोगियों को वर्तमान में न्यूनतम मूल मासिक पेंशन 9,000 रुपये मिलती है।
फिटमेंट फैक्टर 2 के हिसाब से केंद्र सरकार के कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन 36,000 रुपये प्रति माह हो जाएगा। पेंशनभोगियों की न्यूनतम मूल पेंशन 18,000 रुपये प्रति माह हो जाएगी।
गौरतलब है कि 8वें वेतन आयोग के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है और सभी संबंधित पक्ष आयोग के सदस्यों और चेयरमैन की घोषणा का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। केंद्र सरकार अगले महीने यह घोषणा कर सकती है।