चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: चंडीगढ़ में 661 करोड़ रुपये के हरियाणा-चंडीगढ़ फंड घोटाले के आरोपी और बुड़ैल जेल में बंद रियल एस्टेट कारोबारी विक्रम वाधवा को अस्पताल से वापस जेल ले जाने के बजाय होटल ले जाने का मामला सामने आया है। इस मामले में चंडीगढ़ पुलिस के दो कर्मियों समेत कुल पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
गिरफ्तार पुलिसकर्मियों में सब-इंस्पेक्टर जगमेहर और एएसआई सुरिंदर शामिल हैं। वहीं, आरोपी विक्रम वाधवा के साथ उसके दोनों बेटे करण और कुनाल वाधवा को भी गिरफ्तार किया गया है। सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर पूछताछ की जा रही है।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, कोर्ट की अनुमति के बाद विक्रम वाधवा को तबीयत खराब होने पर पुलिस सुरक्षा में इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया था। आरोप है कि इलाज के बाद उसे सीधे बुड़ैल जेल वापस ले जाने के बजाय सेक्टर-17 स्थित एक होटल ले जाया गया, जो उसके एक रिश्तेदार से जुड़ा बताया जा रहा है।
पुलिस का कहना है कि होटल में वाधवा कुछ समय तक रुका और इस दौरान उसने कई लोगों से मुलाकात भी की। सूचना मिलने पर डीएसपी पूनम दिलावरी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने होटल में छापा मारा, जहां वाधवा, दोनों पुलिसकर्मी और अन्य लोग मौजूद मिले। इसके बाद सभी को हिरासत में लेकर कार्रवाई की गई। वाधवा को दोबारा जेल भेज दिया गया, जबकि बाकी आरोपियों से पूछताछ जारी है।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगा रही हैं कि होटल ले जाने की पूरी योजना पहले से बनाई गई थी या नहीं और इसमें किसी अन्य पुलिसकर्मी या अधिकारी की भी भूमिका थी। इसके लिए होटल के सीसीटीवी फुटेज, विजिटर रजिस्टर, मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। साथ ही पुलिसकर्मियों के ड्यूटी रिकॉर्ड और मूवमेंट लॉग भी खंगाले जा रहे हैं।
गौरतलब है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने विक्रम वाधवा को 29 मई को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी के अनुसार, यह मामला हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ प्रशासन और चंडीगढ़-पंचकूला के दो निजी स्कूलों के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक खातों से 661 करोड़ रुपये के कथित गबन से जुड़ा है।