चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: चंडीगढ़ जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पंजाब नेशनल बैंक (PNB) को एक महिला ग्राहक को 1 करोड़ रुपये का हर्जाना देने का आदेश दिया है। यह मामला बैंक लॉकर से ज्वेलरी गायब होने और बिना ग्राहक की सहमति के लॉकर किसी दूसरे व्यक्ति को आवंटित करने से जुड़ा है।
मामले की पृष्ठभूमि:
चंडीगढ़ के सेक्टर 9-B की रहने वाली बेला प्रसाद ने शिकायत दर्ज कराई थी कि सेक्टर 17-B स्थित PNB की 'हाई वैल्यू ब्रांच' में उनका और उनकी माता का साझा खाता और दो लॉकर (नंबर 37 और 38) थे। बैंक की शाखाओं के विलय के बाद उनके खातों को सेक्टर 9 की शाखा में स्थानांतरित कर दिया गया था। बेला का आरोप है कि उन्होंने अपनी मां के निधन के बाद लॉकर नंबर 38 को सरेंडर कर दिया था और उसकी ज्वेलरी लॉकर नंबर 37 में रख दी थी।
विवाद का मुख्य कारण:
वर्ष 2020 की शुरुआत में जब बेला प्रसाद अपना लॉकर (नंबर 37) ऑपरेट करने बैंक पहुँचीं, तो अधिकारियों ने उन्हें यह कहकर रोक दिया कि यह लॉकर पहले ही बंद किया जा चुका है और किसी और को अलॉट कर दिया गया है।
पीड़िता का दावा: उन्होंने कभी लॉकर बंद करने का अनुरोध नहीं किया और लॉकर की मूल चाबी (नंबर 95) अभी भी उनके पास है, जो साबित करता है कि लॉकर सरेंडर नहीं किया गया था।
बैंक का पक्ष: बैंक ने दावा किया कि उनके रिकॉर्ड के अनुसार लॉकर 2013 में ही सरेंडर कर दिया गया था और 2019 में इसे तोड़कर खोला गया था।
आयोग का सख्त फैसला:
आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि बैंक अपनी प्रक्रिया को साबित करने में विफल रहा। आयोग ने कहा:
बैंक यह साबित नहीं कर पाया कि लॉकर बंद करने से पहले ग्राहक को कोई नोटिस दिया गया था या स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में इन्वेंट्री बनाई गई थी।
केवल आंतरिक रिकॉर्ड पेश करना बैंक को उसकी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं करता। लॉकर संचालन में पारदर्शिता न बरतना 'सेवा में कमी' (Deficiency in Service) है।
मुआवजे का विवरण:
आयोग ने बैंक को निम्नलिखित भुगतान करने का निर्देश दिया है:
1,00,00,000 रुपये (1 करोड़): सामान के नुकसान की भरपाई के लिए।
1,00,000 रुपये (1 लाख): मानसिक प्रताड़ना, उत्पीड़न और मुकदमेबाजी के खर्च के लिए।