चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: रियल एस्टेट डेवलपर विक्रम वाधवा, जिन्हें आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़े कथित 597 करोड़ रुपये के सरकारी फंड डायवर्जन मामले में गिरफ्तार किया गया है, ने पूछताछ के दौरान कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम बताए हैं। जांच अधिकारियों के अनुसार वाधवा ने हरियाणा और चंडीगढ़ के कुछ सरकारी विभागों के अधिकारियों के नाम साझा किए हैं, जो कथित तौर पर संदिग्ध लेन-देन से जुड़े हो सकते हैं। पुलिस का कहना है कि फिलहाल इन नामों का खुलासा नहीं किया जा सकता और किसी भी कार्रवाई के लिए संबंधित सरकारों से मंजूरी लेनी होगी।
पुलिस के अनुसार वाधवा ने स्वीकार किया कि उसने पूर्व बैंक मैनेजर रिभव ऋषि के कहने पर कुछ सरकारी विभागों से संपर्क किया था और उन्हें अपने बैंक खाते आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में स्थानांतरित करने के लिए राजी किया था। जांच एजेंसियों का कहना है कि आरोपी ने यह भी बताया है कि वह कथित रूप से डायवर्ट किए गए पैसों से किए गए प्रॉपर्टी निवेश से जुड़े दस्तावेज और शेल कंपनियों के नेटवर्क की जानकारी देने में मदद कर सकता है। फिलहाल पुलिस उसके द्वारा दी गई जानकारी की जांच कर रही है।
जांच में सरकारी खातों, शेल कंपनियों और निजी व्यक्तियों के बीच करोड़ों रुपये के बड़े लेन-देन का पता चला है। वहीं वाधवा के वकील ने चंडीगढ़ की अदालत में कई याचिकाएं दायर कर गिरफ्तारी और हिरासत की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने हिरासत के दौरान उनसे कई दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए और गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी नहीं दी। अदालत से यह भी मांग की गई है कि पुलिस एफआईआर, गिरफ्तारी मेमो और अन्य जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराए ताकि आरोपी अपने कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल कर सके।