चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: चंडीगढ़ की एक अदालत ने उस वकील की जमानत याचिका खारिज कर दी है, जिस पर जेल में बंद एक व्यक्ति को यूएपीए और आर्म्स एक्ट के मामले में जमानत दिलाने के नाम पर 10.77 लाख रुपये लेने का आरोप है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमित कुमार ग्रोवर ने 3 अगस्त को जमानत खारिज करते हुए कहा कि आरोपी खुद वकील है, इसलिए उसके सबूतों से छेड़छाड़ करने और अभियोजन पक्ष के गवाहों को प्रभावित करने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
मामला सेक्टर-39 थाने में इस साल मई में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। शिकायतकर्ता पुष्पिंदर बग्गा के मुताबिक, आरोपी वकील ने उसकी बहन जसप्रीत कौर और उससे कथित तौर पर 5.77 लाख रुपये ऑनलाइन और 5 लाख रुपये नकद लिए थे। आरोप है कि यह रकम जेल में बंद बलजीत सिंह को जमानत दिलाने के नाम पर ली गई। अदालत के मुताबिक, आरोपी ने मोबाइल पर हाई कोर्ट के जज के नाम से कथित जमानत आदेश भी दिखाया था, लेकिन उस पर आधिकारिक मुहर नहीं थी और वह संदिग्ध नजर आया।
बचाव पक्ष ने अदालत में दावा किया कि आरोपी को झूठा फंसाया गया है और उसे मिली रकम कानूनी फीस थी। वकील की ओर से यह भी कहा गया कि वह 5.77 लाख रुपये की ऑनलाइन प्राप्त राशि जांच अधिकारी के पास जमा करने के लिए तैयार है। हालांकि, अभियोजन पक्ष ने इसका विरोध करते हुए बताया कि जांच के दौरान आरोपी से तीन मोबाइल फोन और एक लैपटॉप बरामद हुए हैं, जिन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है और रिपोर्ट अभी बाकी है।
अदालत ने कहा कि आरोपी के खिलाफ लगे आरोपों को झूठा या सही साबित करना मुकदमे के दौरान तय होगा और जमानत के स्तर पर इस पर फैसला नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि 5.77 लाख रुपये लौटाने की पेशकश जमानत देने का आधार नहीं बन सकती, क्योंकि आरोप के मुताबिक कुल 10.77 लाख रुपये लिए गए थे। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया।