चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: मानसा के दलजीत सिंह की मौत के बाद उनके अंतिम संस्कार को लेकर परिवार और प्रशासन के बीच चल रहा विवाद अब खत्म हो गया है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने परिवार की मांग मानते हुए अंतिम संस्कार चंडीगढ़ के बजाय उनके पैतृक गांव भम्मे कलां में कराने की अनुमति दे दी है। अंतिम संस्कार 5 नवंबर को सुबह 11 बजे होगा। परिवार ने साफ किया है कि इसमें सिर्फ परिजन और करीबी रिश्तेदार ही शामिल होंगे। किसी भी राजनीतिक दल या दूसरे संगठन के प्रतिनिधियों को इसमें शामिल होने की इजाजत नहीं होगी।
हाईकोर्ट ने अंतिम संस्कार के दौरान सुरक्षा की जिम्मेदारी पंजाब पुलिस को सौंपी है और इसके लिए जरूरी निर्देश भी जारी किए हैं। बुधवार को दलजीत सिंह के शव का चंडीगढ़ स्थित पीजीआई में दोबारा पोस्टमॉर्टम कराया गया। इसके बाद उनके पिता जरनैल सिंह मोर्चरी से वापस लौट गए। दलजीत की बहन अमरजीत कौर भी इस मामले में हाईकोर्ट पहुंची थीं। परिवार लगातार मांग कर रहा था कि दलजीत का अंतिम संस्कार चंडीगढ़ में नहीं, बल्कि उनके पैतृक गांव में ही किया जाए।
बहन ने की थी सीबीआई जांच की मांग
35 वर्षीय दलजीत सिंह का शव 27 अक्टूबर को मानसा जिले के गांव रमानंदा के पास खेत में मिला था। उनकी मौत को लेकर परिवार और पुलिस के बयान अलग-अलग हैं। परिवार का दावा है कि दलजीत की मौत नशे की ओवरडोज से हुई, जबकि पुलिस इसे हत्या का मामला बता रही है। पुलिस ने शव पर चोट के निशान मिलने की बात कही थी। परिवार ने निष्पक्ष जांच और दोबारा पोस्टमॉर्टम की मांग को लेकर हाईकोर्ट का रुख किया था। दलजीत की बहन अमरजीत कौर ने याचिका में सीबीआई जांच, पीजीआई के विशेषज्ञ डॉक्टरों के बोर्ड से पोस्टमॉर्टम और परिवार की सुरक्षा की मांग की थी।
27 अक्टूबर को खेत में मिला था शव
दलजीत सिंह का शव 27 अक्टूबर की सुबह मानसा जिले के रामानंदी गांव के पास खेतों में मिला था। शुरुआती जांच के बाद पुलिस ने हत्या की आशंका जताई। उनके पिता जरनैल सिंह की शिकायत पर तीन लोगों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया। दूसरी तरफ, परिवार का आरोप है कि दलजीत की मौत नशे की ओवरडोज के कारण हुई। उनकी पत्नी परमजीत कौर के मुताबिक, दलजीत पहले नशे के आदी थे, लेकिन करीब तीन सप्ताह पहले उन्होंने नशा छोड़ दिया था। परिवार इलाके में नशा बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी कर रहा है।
शव को लेकर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुआ था टकराव
27 अक्टूबर को परिवार और ग्रामीण दलजीत का शव लेकर मानसा में झोटा के इंसाफ मोर्चे में शामिल होने जा रहे थे। रामदित्तेवाला चौक के पास पुलिस ने उन्हें रोक लिया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच टकराव हो गया। परिवार ने पुलिस पर लाठीचार्ज करने और जबरन शव अपने कब्जे में लेने का आरोप लगाया। इसके बाद पुलिस शव को एम्स बठिंडा ले गई, जहां 28 अक्टूबर को पोस्टमॉर्टम किया गया। इस दौरान पुलिस टीम पर हमले के आरोप में हत्या के प्रयास समेत अन्य धाराओं के तहत अलग मामला भी दर्ज किया गया। वहीं, पुलिस का कहना था कि भीड़ ने पुलिसकर्मियों पर हमला किया था।
बहन ने हाईकोर्ट में दायर की थी याचिका
दलजीत की बहन अमरजीत कौर ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर मामले की सीबीआई जांच कराने, पीजीआई चंडीगढ़ के डॉक्टरों के बोर्ड से दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने और परिवार को सुरक्षा देने की मांग की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि पुलिस ने परिवार की सहमति के बिना शव को अपने कब्जे में लिया और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग किया। अब हाईकोर्ट ने अंतिम संस्कार पैतृक गांव में कराने की मांग स्वीकार कर ली है।