चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: हरियाणा के पंचकूला में स्कूल के अंदर हमले में गंभीर रूप से घायल हुई छह साल की बच्ची को बुधवार को चंडीगढ़ के पीजीआईएमईआर से छुट्टी मिल गई। अस्पताल से बाहर निकलने पर बच्ची के स्वागत के लिए फूल, गुब्बारे और सजा हुआ घर उसका इंतजार कर रहे थे। परिवार ने उसके घर लौटने की खुशी में खास तैयारियां की थीं। बच्ची के चाचा ने बताया कि अब वह कुछ दिनों तक मोहाली जिले के जीरकपुर के पास पीर मुच्छल्ला स्थित उनके फ्लैट में रहेगी, ताकि उसे आरामदायक माहौल मिल सके। उन्होंने कहा कि बच्ची का परिवार एक छोटे से कमरे में रहता है, जहां सभी के लिए जगह कम पड़ती है। फ्लैट में उसे ठीक होने के लिए ज्यादा जगह और बेहतर सुविधा मिलेगी।
बच्ची के साथ यह हमला हरियाणा के पंचकूला के एक सरकारी स्कूल में हुआ था। आरोप है कि स्कूल की तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले आठ साल के बच्चे ने खाली क्लासरूम में उस पर ईंट और फूलदान से हमला किया। उसने बच्ची का सिर डेस्क पर पटका और उसके चेहरे व शरीर पर पैर से वार किए। इस हमले में बच्ची को चेहरे पर गंभीर चोटें आईं और नाक की हड्डी भी टूट गई थी।
पीजीआई ने उठाया इलाज का पूरा खर्च
बच्ची को 28 अक्टूबर को पीजीआईएमईआर में भर्ती कराया गया था। अस्पताल ने उसके इलाज का पूरा खर्च उठाया। परिवार पर आर्थिक बोझ न पड़े, इसके लिए उसे प्राइवेट रूम की सुविधा भी दी गई। पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रोफेसर जेके महाजन की अगुवाई में डॉक्टरों की टीम ने उसका इलाज किया। ट्रॉमा सेंटर के प्रभारी डॉ. रमन शर्मा ने इलाज से जुड़ी जरूरी व्यवस्थाएं संभालीं, जबकि मेडिकल सुपरिटेंडेंट प्रोफेसर अशोक कुमार ने संस्थान की ओर से सहयोग सुनिश्चित किया। प्रोफेसर महाजन ने बताया कि इलाज के दौरान बच्ची की सेहत के साथ उसके आराम और भावनात्मक स्थिति का भी ध्यान रखा गया।
अस्पताल से छुट्टी मिलने के समय कर्मचारियों ने बच्ची को खास अंदाज में विदाई दी। उसके स्वागत के लिए अस्पताल परिसर में गुब्बारे लगाए गए थे। बच्ची के चाचा ने बताया कि पीजीआई ने परिवार के लिए आने-जाने की व्यवस्था भी की। उन्होंने अस्पताल की मदद के लिए आभार जताया।
बेटी को घर लौटता देख भावुक हुए माता-पिता
अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद बच्ची के चाचा के जीरकपुर स्थित फ्लैट में भी उसके स्वागत की तैयारी की गई थी। परिवार के लोगों ने घर को सजाया और बेटी के लौटने पर उसके माता-पिता भावुक हो गए। चाचा ने बताया कि परिवार पिछले साल ही बच्ची का स्कूल में दाखिला कराना चाहता था, लेकिन समय पर ऐसा नहीं हो पाया। इस साल उसका एडमिशन हुआ था और सभी उसे स्कूल जाते देखने के लिए उत्साहित थे। अब परिवार की सबसे बड़ी इच्छा यही है कि बच्ची जल्द पूरी तरह ठीक हो, आराम से रहे और उसका बचपन खुशियों से भरा हो।