चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: चंडीगढ़ में साझा प्रॉपर्टी के अलग-अलग हिस्सों के मालिकों के लिए अब अपनी प्रॉपर्टी की अलग आईडी बनवाना आसान हो सकता है। बुधवार को नगर निगम की जनरल हाउस बैठक में प्रॉपर्टी टैक्स उपनियम 2003 की धारा 18 में बदलाव के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। इस बदलाव का मकसद उन लोगों को राहत देना है, जो अपनी प्रॉपर्टी के हिस्से का बकाया टैक्स चुकाकर अलग प्रॉपर्टी आईडी लेना चाहते हैं।
प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कांग्रेस पार्षद गुरप्रीत सिंह गैबी ने प्रॉपर्टी टैक्स के बकाया भुगतान का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि किसी एक हिस्से के मालिक को सिर्फ इसलिए अपनी प्रॉपर्टी से जुड़े काम पूरे करने से नहीं रोका जाना चाहिए, क्योंकि दूसरे सह-मालिकों ने टैक्स नहीं भरा है। बैठक में उन लोगों की परेशानियों पर भी चर्चा हुई, जिनके पास संयुक्त रूप से दर्ज प्रॉपर्टी में अलग-अलग मंजिल या हिस्सा है।
अभी के नियमों के मुताबिक, प्रॉपर्टी टैक्स बकाया होने पर मालिकाना हक में बदलाव और उससे जुड़ी दूसरी औपचारिकताएं पूरी करने में परेशानी आती है। बैठक में जॉइंट कमिश्नर हरप्रीत सिंह सूडान ने साफ किया कि मौजूदा नियमों के तहत मालिकाना हक से जुड़े मामलों में आगे बढ़ने से पहले बकाया रकम चुकानी जरूरी है। इस पर गैबी और दूसरे पार्षदों ने नियमों में बदलाव की मांग की, ताकि कोई भी मालिक अपने हिस्से का बकाया टैक्स जमा करके अलग प्रॉपर्टी आईडी बनवा सके। इस फैसले से उन लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनके प्रॉपर्टी से जुड़े काम सह-मालिकों के बीच विवाद या टैक्स न चुकाने के कारण अटके हुए हैं।
बैठक की शुरुआत नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की याद में दो मिनट का मौन रखकर हुई। हालांकि, नागरिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर हंगामे और विरोध के कारण बैठक की शुरुआत में देरी हुई। पहले बैठक टाल दी गई और फिर तय समय से करीब एक घंटे बाद दोपहर 3 बजे कार्यवाही शुरू हुई।
सड़क मरम्मत का मुद्दा भी गरमाया
जीरो आवर के दौरान सड़कों की खराब हालत और विकास कार्यों में देरी का मुद्दा भी छाया रहा। कांग्रेस पार्षदों ने मेयर सौरभ जोशी के सामने सदन में बैठकर विरोध जताया। पार्षद तरुणा मेहता ने जब यह मुद्दा उठाया, तो मेयर ने आश्वासन दिया कि अगले तीन से पांच दिनों में विकास कार्य शुरू हो जाएंगे। पार्षदों ने ठेकेदारों के काम की गुणवत्ता और काम पूरा करने में हो रही देरी पर भी सवाल उठाए। इसके बाद नगर निगम कमिश्नर अमित कुमार ने अधिकारियों को फटकार लगाई और सभी एग्जीक्यूटिव इंजीनियरों को अपने-अपने ठेकेदारों के काम से जुड़ी फाइलों के साथ कार्यालय में पेश होने का निर्देश दिया।