चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: चंडीगढ़ नगर निगम में करीब 250 करोड़ रुपये के वित्तीय एजेंडों को लेकर हुए विवाद और बाद में इन्हें सदन से निरस्त किए जाने के बाद अब निगम की वित्तीय व्यवस्था पर स्वतंत्र निगरानी की मांग उठी है। एडवोकेट और चंडीगढ़ प्रशासन की एडमिनिस्ट्रेटर एडवाइजरी काउंसिल के सदस्य अजय जग्गा ने प्रशासक गुलाब चंद कटारिया को पत्र भेजकर नगर निगम के लिए स्वतंत्र लोकल बॉडीज ओम्बड्समैन यानी लोकायुक्त नियुक्त करने का सुझाव दिया है। उनका कहना है कि ऐसी व्यवस्था से वित्तीय फैसलों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
जग्गा ने कहा कि करीब 250 करोड़ रुपये के एजेंडों का पर्याप्त चर्चा के बिना पारित होना और बाद में नगर निगम सदन द्वारा उन्हें रद्द किया जाना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि नगर निगम की वित्तीय स्थिति पर पहले से दबाव है और राजस्व से जुड़ी चुनौतियों के बीच ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्वतंत्र निगरानी जरूरी है। उन्होंने 13वें वित्त आयोग की सिफारिशों का हवाला देते हुए कहा कि स्थानीय निकायों में बेहतर वित्तीय प्रबंधन और शिकायतों के स्वतंत्र निपटारे के लिए ओम्बड्समैन की व्यवस्था की सिफारिश की गई थी।
प्रस्ताव के मुताबिक लोकल बॉडीज ओम्बड्समैन को नगर निगम में कथित कुप्रशासन, वित्तीय गड़बड़ी, अधिकारों के गलत इस्तेमाल और सरकारी धन के संभावित नुकसान से जुड़े मामलों की स्वतंत्र जांच का अधिकार दिया जा सकता है। इसके अलावा जग्गा ने एडवाइजरी काउंसिल ऑन रेवेन्यू एंड फाइनेंशियल रिफॉर्म्स बनाने का भी सुझाव दिया है। इसमें वित्त, टैक्स, नगर प्रशासन और पब्लिक पॉलिसी से जुड़े अधिकतम छह विशेषज्ञ शामिल किए जा सकते हैं, जो निगम को राजस्व बढ़ाने और खर्चों को बेहतर तरीके से संभालने की सलाह देंगे।
जग्गा ने प्रशासन से वित्तीय प्रस्तावों की जांच के लिए मजबूत व्यवस्था बनाने की भी मांग की है। उनका कहना है कि बड़े वित्तीय एजेंडों को पर्याप्त जांच और पारदर्शी चर्चा के बाद ही मंजूरी मिलनी चाहिए। प्रस्तावित विशेषज्ञ परिषद राजस्व लीकेज रोकने, टैक्स अनुपालन बढ़ाने, खर्चों को तर्कसंगत बनाने और लंबे समय की वित्तीय योजना तैयार करने में मदद कर सकती है। उनके मुताबिक, इससे नगर निगम की वित्तीय स्थिति मजबूत करने के साथ नागरिकों के लिए शिकायतों के समाधान की बेहतर व्यवस्था भी तैयार होगी।