चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: देशभर में जब छात्र-छात्राएं सेंट्रल बोर्ड का सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) की बारहवीं कक्षा की भौतिकी बोर्ड परीक्षा देने पहुंचे, उसी दिन 17 वर्षीय कनिष्का बिष्ट ने अदम्य साहस की मिसाल पेश की। जन्म से मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी जैसी गंभीर आनुवंशिक बीमारी से जूझ रही कनिष्का सीधे आईसीयू से एंबुलेंस के जरिए परीक्षा केंद्र पहुंचीं और परीक्षा दी।
मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी एक ऐसी आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें शरीर में आवश्यक प्रोटीन के सही निर्माण न होने के कारण मांसपेशियां धीरे-धीरे कमजोर होती जाती हैं।
ऑक्सीजन सिलेंडर और मेडिकल टीम के सहयोग से कनिष्का को सेक्टर-13, मनीमाजरा स्थित गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल, मॉडर्न कंपलेक्स में व्हीलचेयर पर परीक्षा कक्ष तक ले जाया गया। 30 जनवरी को उन्हें तेज बुखार हुआ था, जिसके बाद निमोनिया की पुष्टि हुई। हालत बिगड़ने पर 3 फरवरी को उन्हें सेक्टर-32 स्थित गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, सेक्टर 32 में वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। छह दिन बाद उन्हें सेक्टर-44 के चैतन्य हॉस्पिटल , सेक्टर 44 में स्थानांतरित किया गया, जहां वह अब भी आईसीयू में भर्ती हैं।
गंभीर स्थिति के बावजूद कनिष्का का ध्यान अपनी बोर्ड परीक्षाओं पर टिका रहा। उनके पिता प्रेम बिष्ट, जो ज़िरकपुर निवासी व्यवसायी हैं, ने बताया कि बेटी अपनी हालत के बावजूद परीक्षा देने के लिए दृढ़ थीं। उनका कहना है कि वह अपनी पूरी क्षमता के साथ सभी पेपर देना चाहती हैं, हालांकि फिलहाल परिवार की सबसे बड़ी प्राथमिकता उनका शीघ्र स्वस्थ होना है।
कनिष्का ने अपनी शारीरिक स्थिति को कभी अपनी पढ़ाई में बाधा नहीं बनने दिया। कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में भी उन्हें अतिरिक्त एक घंटे का समय दिया गया था, और यही सुविधा इस बार भी प्रदान की गई है। इस वर्ष जेईई मेन परीक्षा उत्तीर्ण कर उन्होंने एक और उपलब्धि हासिल की है और वह इंजीनियर बनने का सपना संजोए हुए हैं।
स्वास्थ्य और सपनों दोनों मोर्चों पर संघर्ष कर रहीं कनिष्का 28 फरवरी को रसायन विज्ञान की अगली बोर्ड परीक्षा में भी शामिल होने की तैयारी कर रही हैं।