चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: चंडीगढ़ के सेक्टर 17 में एक "असुरक्षित घोषित" इमारत में शराब का ठेका चलाने की अनुमति देने पर पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने इस मामले में चंडीगढ़ प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए मुख्य सचिव (Chief Secretary) से स्पष्टीकरण मांगा है।
कोर्ट की कड़ी टिप्पणी:
मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति संजीव बेरी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि केंद्र शासित प्रदेश (UT) प्रशासन, इमारत के मालिक और लाइसेंसधारी के बीच "मिलीभगत" है। कोर्ट ने इस बात पर आश्चर्य और नाराजगी जताई कि जिस इमारत को रहने के लिए असुरक्षित घोषित कर ढहाने का आदेश दिया गया था, वहां शराब का ठेका कैसे चल रहा है।
मामले के मुख्य बिंदु:
असुरक्षित इमारत: याचिकाकर्ता के वकील आनंद चिब्बर ने कोर्ट को बताया कि एससीओ (SCO) 125, 126 और 127 के बेसमेंट का उपयोग 'अहाते' के रूप में किया जा रहा है, जबकि प्रशासन ने पिछले साल अगस्त में इसे "अनधिकृत और अस्वीकार्य" बताया था।
पुराना आदेश: जनहित याचिका (PIL) के अनुसार, इस इमारत को गिराने का आदेश साल 2014 में ही पारित किया गया था। इसके बावजूद प्रशासन ने पिछले साल वहां ठेका खोलने की अनुमति दी और इस साल (2026) भी लाइसेंस रिन्यू कर दिया।
सुरक्षा का खतरा: वकील ने जनवरी 2025 में हुए 'महफिल होटल' के गिरने की घटना का हवाला देते हुए चेतावनी दी कि इस ठेके में एक समय में 200 से 300 लोग मौजूद होते हैं, जिससे किसी बड़े हादसे का डर बना रहता है।
हाई कोर्ट का आदेश:
कोर्ट ने चंडीगढ़ के मुख्य सचिव को एक हलफनामा दायर कर यह बताने का निर्देश दिया है कि अगस्त 2025 में जारी किए गए 'कारण बताओ नोटिस' पर अब तक अंतिम कार्रवाई क्यों नहीं हुई। साथ ही, यह भी पूछा है कि असुरक्षित इमारत में व्यावसायिक गतिविधि की अनुमति कैसे दी गई।
इस मामले की अगली सुनवाई 30 अप्रैल को तय की गई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नागरिकों के जीवन की सुरक्षा करना सरकार का संवैधानिक दायित्व है और वह इसे नजरअंदाज नहीं कर सकती।