चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में उच्च शिक्षा की भूमिका को लेकर आयोजित भारत हायर एजुकेशन समिट में शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने व्यापक चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि विश्वविद्यालयों को केवल शिक्षा देने वाले संस्थानों तक सीमित न रहकर नवाचार, उद्यमिता, अनुसंधान और सामाजिक परिवर्तन के केंद्र के रूप में विकसित होना होगा।
समिट में चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. (डॉ.) रविराजा सीताराम ने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए उच्च शिक्षण संस्थानों को भविष्य के कौशल, उद्योगों की जरूरतों और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप खुद को तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी अब केवल ज्ञान प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें नवाचार और राष्ट्र निर्माण में भी अग्रणी भूमिका निभानी होगी।
कार्यक्रम के दौरान “ज्ञान से राष्ट्रीय संपदा तक”, “विकसित भारत 2047 के लिए मानव संसाधन निर्माण” और “उद्योगों की विश्वविद्यालयों से अपेक्षाएं” जैसे विषयों पर विशेष पैनल चर्चा आयोजित की गई। इसमें उद्योग 4.0, उभरती तकनीकों और रोजगारोन्मुखी शिक्षा को लेकर विचार-विमर्श किया गया।
समिट में कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन प्राइवेट यूनिवर्सिटीज और इंटरनेशनल ऑटोमोबाइल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर भी किए गए। साथ ही ‘द भारत कलेक्टिव’ नामक पहल की शुरुआत की गई, जिसका उद्देश्य निजी विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग बढ़ाना, ज्ञान साझा करना और उच्च शिक्षा से जुड़ी चुनौतियों का सामूहिक समाधान तैयार करना है।