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भारत के हस्तक्षेप से पेरिस में रुकी चंडीगढ़ की विरासत कुर्सियों की नीलामी

Photo Source : Google

Posted On:Friday, July 3, 2026

चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: पेरिस में चंडीगढ़ की ऐतिहासिक विरासत से जुड़ी दो प्रतिष्ठित कुर्सियों की नीलामी भारत के हस्तक्षेप के बाद रोक दी गई। स्विस-फ्रांसीसी वास्तुकार पियरे जेनरेट द्वारा डिज़ाइन की गई इन कुर्सियों को फ्रांसीसी नीलामी घर में 4,000 से 7,000 यूरो की अनुमानित कीमत पर नीलाम किया जाना था, लेकिन भारत सरकार के हस्तक्षेप के बाद इन्हें नीलामी सूची से हटा दिया गया।

चंडीगढ़ प्रशासन ने बताया कि विदेश मंत्रालय (MEA) ने फ्रांस स्थित भारतीय दूतावास के माध्यम से हस्तक्षेप किया, जिसके बाद दोनों वस्तुओं को नीलामी से वापस ले लिया गया।

प्रशासन का कहना है कि ये कुर्सियां निजी संग्रह की वस्तुएं नहीं, बल्कि चंडीगढ़ की सार्वजनिक संस्थाओं की संरक्षित विरासत हैं। दोनों कुर्सियों पर सरकारी संस्थानों के इन्वेंट्री मार्किंग भी मौजूद हैं। एक सागौन और बेंत की कुर्सी पर "PU Chem/55" अंकित है, जो इसे पंजाब विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान विभाग की संपत्ति बताता है। दूसरी कुर्सी पर "PGI/W/CH-0202" अंकित है, जिससे उसका संबंध पीजीआईएमईआर (PGIMER) से जुड़ता है।

चंडीगढ़ प्रशासन ने कहा कि ये फर्नीचर ले कोर्बुज़िए और पियरे जेनरेट की उस आधुनिक वास्तुकला विरासत का हिस्सा हैं, जिसने आज़ादी के बाद भारत के पहले नियोजित शहर चंडीगढ़ की पहचान बनाई। प्रशासन ने यह भी रेखांकित किया कि चंडीगढ़ का कैपिटल कॉम्प्लेक्स यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है, इसलिए उससे जुड़ी डिजाइन वस्तुओं का भी विशेष महत्व है।

इस मामले ने तब और तूल पकड़ा जब चंडीगढ़ के अधिवक्ता अजय जग्गा ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर, संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और पेरिस स्थित भारतीय दूतावास को पत्र लिखकर नीलामी पर आपत्ति जताई। उन्होंने 2011 में गृह मंत्रालय द्वारा जारी उस आदेश का हवाला दिया, जिसमें चंडीगढ़ की विरासत से जुड़ी वस्तुओं को देश से बाहर ले जाने और बिना अनुमति हस्तांतरित करने पर रोक लगाई गई है।

इन कुर्सियों का इतिहास 1951 से जुड़ा है, जब प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने स्वतंत्र भारत के पहले नियोजित शहर चंडीगढ़ के निर्माण की जिम्मेदारी प्रसिद्ध वास्तुकार ले कोर्बुज़िए को सौंपी थी। उनके सहयोगी और चचेरे भाई पियरे जेनरेट ने शहर के भवनों, सार्वजनिक स्थलों और फर्नीचर की डिजाइन तैयार की थी। समय के साथ ये कुर्सियां वैश्विक स्तर पर आधुनिक डिजाइन का प्रतीक बन गईं और अंतरराष्ट्रीय कला एवं डिजाइन बाजार में काफी लोकप्रिय हुईं।


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