चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: चंडीगढ़ में छात्र परिषद चुनाव के प्रचार का तरीका इस बार काफी बदलता नजर आ रहा है। छात्र संगठनों की ओर से महंगी क्लब पार्टियां आयोजित की जा रही हैं, जिन पर कथित तौर पर 1 से 3 लाख रुपये तक खर्च हो रहे हैं। यह खर्च लिंगदोह समिति की ओर से कॉलेज और यूनिवर्सिटी चुनाव प्रचार के लिए सुझाई गई 5,000 रुपये की सीमा से कई गुना ज्यादा है। छात्र संगठन इन पार्टियों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर भी शेयर कर रहे हैं।
इन पार्टियों का सिलसिला 14 अगस्त से ही शुरू हो गया था। सेक्टर-32 स्थित GGDSD कॉलेज के Independent Student Front (ISF) ने सेक्टर-26 के एक क्लब में पार्टी रखी, जिसमें पंजाबी गायक ने प्रस्तुति दी। इसके बाद 20 अगस्त को मोहाली के फेज-9 में BA और BVoc छात्रों के लिए एक और पार्टी आयोजित की गई। Sanatan Dharam Campus Union (SDCU) ने 21 और 29 अगस्त को सेक्टर-26 में पार्टियां कीं। वहीं INSO ने DAV कॉलेज सेक्टर-10 और PGGC-11 के छात्रों के लिए अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए। शनिवार को SOI, ABVP और HIMSU ने भी पंचकूला में पार्टी रखी।
एक क्लब मैनेजर के मुताबिक, ऐसी पार्टी का खर्च कम से कम 1 लाख रुपये से शुरू होकर 3 लाख रुपये तक पहुंच सकता है। फ्रेशर्स पार्टियों में 300 से लेकर 1,000 तक छात्र शामिल होते हैं और प्रति छात्र 350 से 800 रुपये तक का खर्च आता है। एक छात्र नेता ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि चुनाव जीतने के लिए पार्टियां जरूरी हो गई हैं और मुफ्त चीजें नहीं देने पर छात्र वोट नहीं देते। हालांकि, INSO के एक नेता ने इन कार्यक्रमों को चुनाव प्रचार का हिस्सा मानने से इनकार किया और कहा कि छात्रों के योगदान से सिर्फ सॉफ्ट ड्रिंक और स्नैक्स की व्यवस्था की जाती है।
पंजाब यूनिवर्सिटी की पूर्व छात्र परिषद अध्यक्ष कनुप्रिया और राजनीतिक विज्ञान के प्रोफेसर आशुतोष कुमार ने चुनाव में बढ़ते खर्च पर चिंता जताई है। कनुप्रिया ने कहा कि उनकी जीत का आधार पूरे साल छात्रों के बीच काम करना था, न कि मुफ्त चीजें बांटना। वहीं प्रोफेसर कुमार के मुताबिक, ज्यादा पैसा खर्च करने से आर्थिक रूप से मजबूत छात्रों और संगठनों को फायदा मिलता है और स्वतंत्र उम्मीदवारों के लिए चुनाव लड़ना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा कि 5,000 रुपये की मौजूदा सीमा को व्यावहारिक बनाने के लिए दिशानिर्देशों में बदलाव की जरूरत है।