चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: चंडीगढ़ से कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने यूटी प्रशासन द्वारा चंडीगढ़ मास्टर प्लान-2031 में प्रस्तावित संशोधनों पर विस्तृत आपत्तियां दर्ज कराई हैं। उन्होंने कहा कि डिरेगुलेशन 1.0 और 2.0 के तहत प्रस्तावित बदलाव शहर की मूल नियोजन व्यवस्था, बुनियादी ढांचे और विश्वस्तरीय शहरी पहचान को प्रभावित कर सकते हैं। तिवारी ने विशेषज्ञ समिति के गठन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें स्वतंत्र नगर नियोजकों, पर्यावरणविदों, विरासत विशेषज्ञों और जनप्रतिनिधियों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है।
तिवारी ने जनसुनवाई के लिए दिए गए 21 दिनों के समय को अपर्याप्त बताते हुए इसे कम से कम 60 दिन करने और शहर के सभी 35 वार्डों में परामर्श बैठकों की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि प्रस्तावित संशोधनों से पहले यातायात, पर्यावरण, पार्किंग, सार्वजनिक सुविधाओं और विरासत संरक्षण से जुड़े आवश्यक तकनीकी अध्ययन सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, जिससे बदलावों के वास्तविक प्रभाव का आकलन करना मुश्किल है।
सांसद ने भवनों की ऊंचाई 30 मीटर तक बढ़ाने, ग्राउंड कवरेज 40 प्रतिशत और एफएआर 2.5 से 3.0 तक करने के प्रस्ताव पर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि इससे चंडीगढ़ की "सन, स्पेस एंड वर्ड्योर" आधारित मूल नियोजन अवधारणा प्रभावित होगी, खुले स्थान कम होंगे और शहर की प्राकृतिक पहचान बदल सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि भूकंप संवेदनशील जोन-4 में स्थित चंडीगढ़ में ऊंची इमारतों के लिए सुरक्षा और आपदा प्रबंधन की मजबूत व्यवस्था जरूरी है।
वहीं, भाजपा नेता संजय टंडन ने प्रस्तावित सुधारों का समर्थन करते हुए कहा कि शहर की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए विकास आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आसपास के क्षेत्रों में तेजी से हाईराइज विकास हो रहा है और चंडीगढ़ को भी समय के साथ आगे बढ़ना चाहिए, हालांकि इसकी विरासत और मूल स्वरूप की रक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।