चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: चंडीगढ़ में ओला, उबर, इनड्राइव और रैपिडो की सेवाओं पर रोक के बावजूद इनके जरिए राइड बुक होने का सिलसिला पूरी तरह थमा नहीं है। कई ड्राइवर कथित तौर पर अलग-अलग तरीकों से बैन के बावजूद यात्रियों को ले जा रहे हैं। दूसरी तरफ, चंडीगढ़ पुलिस और स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी यानी एसटीए ने भी इन्हीं ऐप्स का इस्तेमाल कर ऐसे ड्राइवरों को पकड़ने का तरीका निकाल लिया है। अब तक 915 वाहनों पर कार्रवाई की जा चुकी है, जिनमें 812 के चालान काटे गए और 103 वाहन जब्त किए गए। अधिकारियों के मुताबिक, इस कार्रवाई से 91.5 लाख रुपये का जुर्माना भी वसूला गया है।
अधिकारियों के अनुसार, कुछ ड्राइवर बुकिंग मिलने के बाद फोन को एयरप्लेन मोड पर कर देते हैं। कुछ मामलों में यात्री से ऐप पर दिख रही रकम लेने के बाद राइड कैंसिल कर दी जाती है और ड्राइवर ऑफलाइन होकर यात्रा जारी रखता है। आरोप है कि कुछ ड्राइवर कार्रवाई से बचने के लिए यात्रियों से यह कहने को भी कहते हैं कि उन्होंने वाहन सड़क पर खड़ा देखा और सीधे किराये पर लिया था। इस तरह फोन को एयरप्लेन मोड पर करना भी उनके लिए जांच एजेंसियों से बचने का एक तरीका बन गया है।
पुलिस और परिवहन अधिकारी अब इन तरीकों का जवाब इन्हीं प्रतिबंधित ऐप्स के जरिए दे रहे हैं। अधिकारी सामान्य यात्री बनकर राइड बुक करते हैं और वाहन पहुंचने के बाद ड्राइवर का फोन और संबंधित ऐप चेक करते हैं। इससे यह पता लगाने में मदद मिलती है कि वाहन प्रतिबंधित प्लेटफॉर्म के जरिए चल रहा था या नहीं। प्रशासन ने केंद्र से जीपीएस आधारित ऐसा सिस्टम बनाने की मांग भी की है, जिससे चंडीगढ़ में इन ऐप्स के जरिए राइड बुकिंग को रोका जा सके।
एसटीए के आंकड़ों के मुताबिक, कार्रवाई की सबसे ज्यादा मार बाइक टैक्सियों पर पड़ी है। 915 वाहनों में 636 बाइक टैक्सियां थीं, जिनमें 569 के चालान हुए और 67 जब्त की गईं। इसके अलावा 208 टैक्सियों पर कार्रवाई हुई, जिनमें 194 के चालान और 14 वाहन जब्त किए गए। 71 ऑटो-रिक्शा भी कार्रवाई के दायरे में आए। चंडीगढ़ प्रशासन ने ओला का लाइसेंस 17 जून, इनड्राइव का 10 अगस्त और उबर-रैपिडो के लाइसेंस 8 सितंबर से छह महीने के लिए निलंबित किए थे। प्रशासन के मुताबिक, इन कंपनियों ने ड्राइवर इंश्योरेंस, ट्रेनिंग, किराए, वाहन पात्रता और सुरक्षा समेत 2025 के एग्रीगेटर नियमों से जुड़ी जरूरी शर्तों का पालन नहीं किया था।