चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: नगर निगम में 14 लाख रुपये की कथित रिश्वत के मामले में अब कई बड़े अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। डंपिंग ग्राउंड में जेसीबी से सफाई का काम करने वाले ठेकेदार प्रशांत भदौरिया ने सीबीआई को दी शिकायत में सैनिटरी इंस्पेक्टर से लेकर ज्वाइंट कमिश्नर और पीसीएस अधिकारी बलबीर राज सिंह तक का नाम लिया है। ठेकेदार का आरोप है कि बिल पास कराने के बदले उससे रिश्वत मांगी गई और कहा गया कि रकम अधिकारियों तक पहुंचाई जानी है।
प्रशांत भदौरिया के मुताबिक, सैनिटरी इंस्पेक्टर शक्ति शर्मा ने बिल क्लियर कराने के लिए उससे 14 लाख रुपये मांगे थे। ठेकेदार का दावा है कि जब उसने इस बारे में ज्वाइंट कमिश्नर बलबीर राज सिंह से शिकायत की, तो उन्होंने भी कथित तौर पर रिश्वत देने के लिए कहा। आरोप है कि ऐसा नहीं करने पर पेमेंट रोकने और टेंडर रद्द करने की बात कही गई। भदौरिया ने शिकायत में दावा किया कि रकम शक्ति शर्मा के अलावा सैनिटरी इंस्पेक्टर नितिन, चीफ सैनिटरी इंस्पेक्टर कुलबीर, एसएएस अकाउंट्स संदीप सेठी और बलबीर राज सिंह के बीच बांटी जानी थी। इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
सीबीआई ने बुधवार को सेक्टर-11 की मार्केट में एक कार के अंदर ठेकेदार से पांच लाख रुपये की कथित रिश्वत लेते हुए शक्ति शर्मा को गिरफ्तार किया था। गुरुवार को उसे सीबीआई की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। शिकायत के मुताबिक, प्रशांत भदौरिया की फर्म को मार्च 2026 में नगर निगम ने अलग-अलग लैंडफिल साइट पर जेसीबी और टिप्पर उपलब्ध कराने का तीन साल का ठेका दिया था। फर्म का औसतन करीब 10 लाख रुपये महीने का बिल बनता था। ठेकेदार का आरोप है कि शक्ति शर्मा जुलाई 2025 से हर महीने एक लाख रुपये मांग रहा था और रिश्वत नहीं देने पर उसके बिल रोक दिए जाते थे। उसने इस बारे में ज्वाइंट कमिश्नर बलबीर राज सिंह और अकाउंट सेक्शन के अधिकारी संदीप सेठी को भी जानकारी देने का दावा किया है। इसके बाद उसने सीबीआई से संपर्क किया। एजेंसी ने शिकायत की जांच कर जाल बिछाया।
अब सीबीआई रिश्वत के आरोपों के साथ डंपिंग ग्राउंड से जुड़े पूरे प्रोजेक्ट की भी जांच कर सकती है। नगर निगम यहां कचरा उठाने और उसके निपटारे पर अब तक करीब 150 करोड़ रुपये खर्च कर चुका है। इस काम में एक दर्जन से ज्यादा जेसीबी और टिप्पर लगाए गए हैं। जांच के तहत टेंडर प्रक्रिया, भुगतान, हाजिरी और संबंधित अधिकारियों की भूमिका से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल की जा सकती है। कॉल डिटेल और दूसरे रिकॉर्ड के जरिए यह पता लगाने की कोशिश होगी कि कथित रिश्वत की मांग केवल शक्ति शर्मा तक सीमित थी या इसमें अन्य लोगों की भी भूमिका थी।