चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: 661 करोड़ रुपये के कथित धोखाधड़ी मामले में न्यायिक हिरासत में बंद कारोबारी विक्रम वाधवा को मेडिकल जांच के बहाने जेल से बाहर लाने के बाद होटल ले जाने का मामला सामने आया है। इस मामले में चंडीगढ़ पुलिस ने दो पुलिसकर्मियों, विक्रम वाधवा और उनके दो बेटों को गिरफ्तार किया है। मामले की जांच जारी है।
पुलिस के अनुसार, विक्रम वाधवा को तबीयत खराब होने की शिकायत पर अदालत की अनुमति से इलाज के लिए बुरैल जेल से अस्पताल ले जाया गया था। आरोप है कि अस्पताल से लौटते समय उन्हें सीधे जेल वापस ले जाने के बजाय सेक्टर-17 स्थित एक होटल ले जाया गया। वहां कुछ समय तक वाधवा रुके और कथित तौर पर कई लोगों से मुलाकात की।
सूचना मिलने पर डीएसपी पूनम दिलावरी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने होटल में छापा मारा। पुलिस ने मौके से विक्रम वाधवा, उनके बेटे करण वाधवा और कुणाल वाधवा के साथ एस्कॉर्ट ड्यूटी पर तैनात सब-इंस्पेक्टर जगमेहर और एएसआई सुरिंदर को हिरासत में लिया। बाद में वाधवा को दोबारा जेल भेज दिया गया, जबकि बाकी आरोपियों को पूछताछ के लिए गिरफ्तार किया गया।
पुलिस अब यह जांच कर रही है कि होटल ले जाने की योजना पहले से बनाई गई थी या नहीं। मामले में सीसीटीवी फुटेज, विजिटर रजिस्टर, मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और ड्यूटी रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
विक्रम वाधवा को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 29 मई को 661 करोड़ रुपये के कथित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक धोखाधड़ी मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह मामला हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ प्रशासन और दो निजी स्कूलों के बैंक खातों से कथित गबन से जुड़ा है।