चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: चंडीगढ़ नगर निगम और चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड से जुड़े करीब 116 करोड़ रुपये के फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट रिसीट (FDR) घोटाले की जांच तेज हो गई है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अब नगर निगम आयुक्त को नोटिस जारी कर पूरे मामले से जुड़े सभी दस्तावेज तलब किए हैं, जिससे जांच को और गहराई दी जा सके।
CBI ने खास तौर पर कुछ पूर्व और मौजूदा अधिकारियों के सेवा रिकॉर्ड, नियुक्ति आदेश, तैनाती विवरण और उनके हस्ताक्षर व लिखावट के नमूने मांगे हैं। इनमें बर्खास्त अकाउंटेंट अनुभव मिश्रा, पूर्व स्मार्ट सिटी वित्त अधिकारी नलिनी मलिक और पूर्व संयुक्त आयुक्त गुरिंदर सिंह सोढ़ी शामिल हैं। एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि इस वित्तीय गड़बड़ी में किन-किन अधिकारियों की भूमिका रही।
जांच एजेंसी ने निर्देश दिया है कि सभी रिकॉर्ड चंडीगढ़ स्थित CBI की एंटी-करप्शन ब्रांच, सेक्टर-30 कार्यालय में जमा कराए जाएं। साथ ही यह भी चेतावनी दी गई है कि निर्देशों का पालन न करने पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 210 के तहत कार्रवाई हो सकती है।
मामला 11 मई 2026 को दर्ज हुआ था, जिसमें आरोप है कि IDFC फर्स्ट बैंक से जुड़े फर्जी FDR बनाकर सरकारी धन का गबन किया गया। शुरुआती जांच में करीब 116 करोड़ रुपये की हेराफेरी सामने आई थी, जिसके बाद नगर निगम की मंजूरी और प्रशासन की सिफारिश पर यह केस CBI को सौंपा गया। फिलहाल एजेंसी सभी दस्तावेजों और बैंक रिकॉर्ड की गहन जांच कर रही है ताकि पूरे घोटाले की कड़ी जोड़ी जा सके।