चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: चंडीगढ़ जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-II ने कनाडा स्टडी वीजा दिलाने के नाम पर एक छात्रा से धोखाधड़ी करने के मामले में इमिग्रेशन कंसल्टेंसी बीबी काउंसिल के संचालक रविंदर सिंह और पुष्पिंदर कौर को सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक गतिविधि का दोषी ठहराया है। आयोग ने दोनों को छात्रा के 12.35 लाख रुपये ब्याज समेत लौटाने का आदेश दिया है।
शिकायतकर्ता ने बताया कि उसने फेसबुक पर कनाडा स्टडी वीजा से जुड़ा विज्ञापन देखने के बाद बीबी काउंसिल की सेवाएं ली थीं। वीजा प्रोसेस, कॉलेज फीस, जीआईसी और अन्य खर्चों के लिए उसने कुल 12.35 लाख रुपये जमा किए। कंसल्टेंसी ने दावा किया कि उसका कनाडा के अकादमी ऑफ लर्निंग (AOL) कॉलेज में दाखिला हो गया है और उसे ऑफर लेटर व लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस भी दिए गए।
बाद में छात्रा ने खुद कॉलेज से संपर्क किया तो ईमेल के जरिए पता चला कि उसके नाम से कॉलेज में कोई एडमिशन रिकॉर्ड ही मौजूद नहीं है। इसके बाद उसने कंसल्टेंसी से पैसे वापस मांगे, लेकिन रकम लौटाने से इनकार कर दिया गया। कंसल्टेंसी ने इसके लिए अपनी पूर्व कर्मचारी पुष्पिंदर कौर को जिम्मेदार बताया।
सुनवाई के दौरान रविंदर सिंह और पुष्पिंदर कौर आयोग के सामने पेश नहीं हुए, जिसके बाद उनके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की गई। आयोग ने छात्रा के हलफनामे और कॉलेज की ईमेल को अहम साक्ष्य माना। आयोग ने कहा कि कंसल्टेंसी ने एडमिशन दिलाने का झूठा दावा किया, फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराए और वादा पूरा न करते हुए पैसे भी वापस नहीं किए। यह सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक गतिविधि का मामला है।
आयोग ने दोनों आरोपियों को छात्रा के 12.35 लाख रुपये 9% वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने का आदेश दिया है। साथ ही मानसिक उत्पीड़न और मुकदमे के खर्च के लिए 20 हजार रुपये अतिरिक्त देने को कहा है। आयोग ने आदेश की प्रति मिलने के 45 दिनों के भीतर भुगतान करने के निर्देश दिए हैं।