चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: यूटी में अडानी गैस बिल के नाम पर साइबर ठगी के 15 से ज्यादा मामले सामने आने के बाद साइबर क्राइम पुलिस ने इस मामले में पहली गिरफ्तारी की है। पुलिस ने झारखंड के जामताड़ा जिले से 23 वर्षीय बिमल कुमार मंडल उर्फ विदुर को गिरफ्तार किया है। आरोपी को 15 जून 2026 को दर्ज एक मामले की जांच के दौरान पकड़ा गया।
मामले में शिकायतकर्ता ने बताया था कि उसे व्हाट्सऐप पर मैसेज और कॉल के जरिए संपर्क किया गया। आरोपी ने उसे बताया कि पिछले महीने का गैस बिल जमा नहीं होने के कारण उसका अडानी गैस कनेक्शन काट दिया जाएगा। इसके बाद उसे कनेक्शन अपडेट करने के नाम पर एक एपीके एप्लिकेशन डाउनलोड करने के लिए कहा गया।
एप्लिकेशन डाउनलोड करते ही आरोपी ने कथित तौर पर उसके मोबाइल तक पहुंच हासिल कर ली। इसके बाद उसके बैंक खाते से बिना अनुमति के कई लेन-देन किए गए और पीड़ित को करीब 6 लाख रुपये का नुकसान हुआ।
टेलीग्राम से मिला था ग्राहक डेटा और एपीके
तकनीकी जांच और पुलिस की फील्ड इन्वेस्टिगेशन के आधार पर टीम ने झारखंड के जामताड़ा में छापेमारी कर बिमल कुमार मंडल को गिरफ्तार किया। पूछताछ में सामने आया कि आरोपी ने टेलीग्राम के जरिए किसी व्यक्ति से अडानी गैस ग्राहकों का डेटा और खतरनाक एपीके फाइलें हासिल की थीं।
पुलिस के मुताबिक आरोपी अडानी गैस ग्राहकों को व्हाट्सऐप मैसेज और कॉल करता था। वह उन्हें बिल बकाया होने या गैस कनेक्शन अपडेट करने की बात कहकर अपने जाल में फंसाता था। इसके बाद कनेक्शन अपडेट करने के नाम पर उन्हें एक एपीके फाइल भेजकर मोबाइल का एक्सेस हासिल कर लेता था।
डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड और यूपीआई से निकाले पैसे
मोबाइल का एक्सेस मिलने के बाद आरोपी कथित तौर पर पीड़ितों के डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड और यूपीआई के जरिए पैसे निकालता था। ठगी की रकम को साइबर फ्रॉड नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों तक अलग-अलग बैंक खातों, वॉलेट और अन्य माध्यमों से पहुंचाया जाता था।
पुलिस ने आरोपी के पास से 10 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इन मोबाइल में अडानी गैस ग्राहकों का डेटा और एपीके फाइलें मिली हैं। इनका इस्तेमाल पीड़ितों को कॉल करने और व्हाट्सऐप मैसेज भेजने के लिए किया जाता था।
अडानी गैस के अंदर के व्यक्ति पर भी शक
जांच के दौरान पुलिस को शक हुआ है कि अडानी गैस का कोई कर्मचारी भी इस साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है। आरोप है कि किसी अंदरूनी व्यक्ति ने ग्राहकों का डेटा आरोपियों तक पहुंचाया, जिसके आधार पर लोगों को निशाना बनाया जा रहा था। पुलिस अब इस कड़ी की भी जांच कर रही है।
पांच दिन की पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अब नेटवर्क से जुड़े दूसरे आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए जांच आगे बढ़ा रही है।