चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: निजी क्षेत्र के IDFC First Bank ने अपनी चंडीगढ़ शाखा में सामने आए ₹646 करोड़ के कथित वित्तीय घोटाले को लेकर फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट जारी की है। KPMG द्वारा की गई जांच में पाया गया कि यह एक अलग-थलग घटना थी, जिसमें शाखा के कुछ कर्मचारियों, ग्राहकों के प्रतिनिधियों और बाहरी व्यक्तियों की मिलीभगत शामिल थी। जांच में बैंक की कोर बैंकिंग प्रणाली (CBS) में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं पाई गई।
रिपोर्ट के अनुसार, अनधिकृत लेनदेन को अंजाम देने के लिए कथित तौर पर संशोधित अथवा फर्जी प्राधिकरण पत्र, चेक और अनुमोदन ईमेल का उपयोग किया गया। इन दस्तावेजों को शाखा के तत्कालीन कर्मचारियों द्वारा लेनदेन वाउचरों के साथ जोड़ा गया था। कई मामलों में हस्ताक्षरों में भी असंगतियां पाई गईं। इतना ही नहीं, ग्राहकों को कथित तौर पर फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट एडवाइस (FDA), संपादित ब्याज प्रमाणपत्र और संशोधित बैंक स्टेटमेंट भी उपलब्ध कराए गए।
मामला फरवरी 2026 में तब सामने आया था, जब हरियाणा सरकार के एक विभाग ने अपना खाता बंद कर राशि दूसरे बैंक में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया। इस दौरान खाते की वास्तविक शेष राशि और विभाग की जानकारी में मौजूद राशि में बड़ा अंतर पाया गया। इसके बाद बैंक ने आंतरिक और फॉरेंसिक जांच शुरू की थी।
बैंक ने कहा कि फॉरेंसिक रिपोर्ट में सामने आई लगभग ₹646 करोड़ की मूल राशि उसके पहले के खुलासों के अनुरूप है। बैंक ने संबंधित सरकारी विभागों को मूल धनराशि और उस पर लागू ब्याज का भुगतान कर दिया है तथा इसे वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही के खातों में दर्ज किया गया है। बैंक ने स्वयं को इस वित्तीय धोखाधड़ी का पीड़ित बताते हुए कहा कि वह जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रहा है।