चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: चंडीगढ़ में ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों के खिलाफ जारी चालानों में से 70 फीसदी अब भी लंबित हैं। ट्रैफिक पुलिस ने 2022 से इस साल 1 अक्टूबर तक कुल 33.7 लाख चालान जारी किए, लेकिन इनमें से सिर्फ 10.2 लाख यानी करीब 30 फीसदी का ही निपटारा हुआ है। बाकी 23.4 लाख चालान का भुगतान या निपटारा होना अभी बाकी है। सुप्रीम कोर्ट ने 1 अक्टूबर को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया था कि जिन वाहनों पर ट्रैफिक चालान बकाया हैं, उनसे जुड़ी कुछ सेवाओं पर रोक लगाई जाए। इनमें वाहन रजिस्ट्रेशन का नवीनीकरण, फिटनेस और प्रदूषण नियंत्रण (पीयूसी) सर्टिफिकेट, गाड़ी का मालिकाना हक ट्रांसफर और ड्राइविंग लाइसेंस का नवीनीकरण जैसी सेवाएं शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, देशभर में जारी कुल चालानों में से करीब 47 फीसदी अब भी लंबित हैं। अदालत सड़क सुरक्षा से जुड़ी 2012 की याचिका पर सुनवाई कर रही है और पिछले करीब 14 साल से मोटर वाहन अधिनियम और केंद्रीय मोटर वाहन नियमों को लागू करने की निगरानी कर रही है। सुनवाई के दौरान जजों ने चिंता जताई कि अगर निर्देशों पर जमीन पर अमल नहीं हुआ, तो वे सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाएंगे।
चंडीगढ़ में इस साल 1 अक्टूबर तक करीब 4.9 लाख चालान जारी किए गए। यह संख्या पिछले साल जारी 6.5 लाख चालानों से कम है, लेकिन त्योहारों के दौरान ट्रैफिक बढ़ने के कारण इस साल भी कुल आंकड़ा पिछले साल के आसपास पहुंचने की उम्मीद है। दिसंबर 2025 में लोकसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार, चंडीगढ़ में 2022 से 2024 के बीच जारी ई-चालानों पर 81.7 करोड़ रुपये का जुर्माना बकाया था। इस अवधि के नए आंकड़े अभी उपलब्ध नहीं हैं।
चंडीगढ़ ट्रैफिक पुलिस के पूर्व मुख्य ट्रैफिक मार्शल, रिटायर्ड विंग कमांडर सीएस ग्रेवाल ने सुझाव दिया कि अगर 30 दिन के भीतर चालान का भुगतान नहीं किया जाता, तो जुर्माना दोगुना कर देना चाहिए। इसके बाद भुगतान होने तक जुर्माने की रकम धीरे-धीरे बढ़ाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि टोल प्लाजा पर ऐसा सिस्टम होना चाहिए, जिससे बकाया चालानों का पता चल सके। छह महीने तक लंबित चालानों का भुगतान मौके पर कराया जाए और छह महीने से ज्यादा पुराने चालानों के मामलों में वाहन जब्त करने का प्रावधान हो। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि वाहन चालकों को एमपरिवहन या वाहन ऐप इंस्टॉल करना चाहिए, ताकि उन्हें व्हाट्सऐप पर तुरंत अलर्ट मिल सके।
ग्रेवाल के मुताबिक, डाक से भेजे गए चालान कई बार संबंधित लोगों तक नहीं पहुंचते, क्योंकि लाइसेंस बनवाते समय कुछ लोग गलत पता देते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि जनवरी 2027 में मनाए जाने वाले राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के दौरान लोगों को इन नियमों और सुविधाओं के बारे में जागरूक किया जाए। ट्रैफिक के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सुमेर प्रताप सिंह से इस मामले पर प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी।
2,000 से ज्यादा कैमरों से रखी जा रही नजर
चंडीगढ़ ट्रैफिक पुलिस मुख्य रूप से इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) के जरिए नियम तोड़ने वालों पर नजर रखती है। इस सिस्टम में 2,000 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। नियमित रखरखाव के लिए कुछ कैमरे बंद किए जाते हैं, लेकिन करीब 90 से 95 फीसदी कैमरे काम करते रहते हैं। एक पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इन कैमरों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर अपने आप चालान जारी करने के लिए किया जाता है। इससे पुलिसकर्मियों को ट्रैफिक संभालने, लोगों को जागरूक करने और सुरक्षा से जुड़े कामों पर ध्यान देने में मदद मिलती है।
इसके बावजूद ट्रैफिक पुलिस सड़कों पर मैनुअल चेकिंग भी करती है। फिलहाल सेक्टर-8, 9, 10, 11, 15 और 22 के प्रमुख बाजारों के साथ मनीमाजरा और सेक्टर-26 व 34 की मंडियों में विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। रात के समय नशे में गाड़ी चलाने वालों को पकड़ने के लिए भी चेकिंग की जाती है।
बकाया चालान होने पर किन सेवाओं पर लगेगी रोक?
आईसीसीसी सिस्टम से जारी ई-चालान वाहन के रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड से जुड़े मोबाइल नंबर पर अपने आप भेजे जाते हैं। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, बकाया ई-चालान होने पर वाहन मालिकों को बीमा नवीनीकरण, पीयूसी सर्टिफिकेट लेने और वाहन बेचने या उसका मालिकाना हक ट्रांसफर करने में परेशानी हो सकती है। ये सेवाएं केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के वाहन पोर्टल से जुड़ी हैं, जहां बकाया चालान वाले रिकॉर्ड की पहचान हो जाती है। बार-बार नियम तोड़ने वालों के वाहन जब्त करने का आदेश अदालत भी दे सकती है।
आम लोग भी ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन की शिकायत कर सकते हैं। सिग्नल तोड़ने, बाइक पर तीन लोगों के बैठने या बिना हेलमेट दोपहिया चलाने जैसे मामलों की फोटो चंडीगढ़ ट्रैफिक पुलिस के सोशल मीडिया अकाउंट या व्हाट्सऐप हेल्पलाइन 9779580985 पर भेजी जा सकती है। फोटो के साथ घटना का समय और जगह बताना जरूरी है। तस्वीर में गाड़ी का नंबर और नियम तोड़ने का तरीका साफ दिखना चाहिए। हालांकि, यह सुविधा सिर्फ कुछ चुनिंदा तरह के उल्लंघनों के लिए उपलब्ध है।