चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: साल 1978 में एक छोटे से कमरे से शुरू हुआ सेक्टर 23 का प्राचीन शिव मंदिर आज एक भव्य मंदिर का रूप ले चुका है। यहां नर्मदेश्वर भगवान शिव की स्थापना की गई है और सावन के पावन महीने में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। महिला मंडल कीर्तन करती हैं, सुबह जलाभिषेक होता है और शाम को भगवान का सुंदर शृंगार किया जाता है। खास बात यह है कि हर सोमवार को श्रद्धालुओं को खीर और मालपुए का प्रसाद भी वितरित किया जाता है।
इस मंदिर की देखरेख ‘प्राचीन शिव मंदिर सभा’ करती है, जिसके प्रधान राजीव करकरा ने विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पहले मंदिर केवल एक छोटे कमरे तक सीमित था, लेकिन चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा भूमि दिए जाने और स्थानीय लोगों के सहयोग से यह मंदिर धीरे-धीरे एक भव्य स्वरूप में तब्दील हो गया। आज मंदिर में शनिदेव, बाबा बालक नाथ और राम परिवार की भी स्थापना है और सभी हिंदू त्योहार यहां पूरे उल्लास के साथ मनाए जाते हैं।
श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर यहां आकर्षक झांकियां निकाली जाती हैं, जिनमें 5 से 12 वर्ष तक के बच्चे हिस्सा लेते हैं। इस आयोजन का दृश्य बहुत मनोहारी होता है और पूरे इलाके में उत्सव का माहौल बन जाता है। मंदिर का माहौल श्रद्धा और संस्कृति से भरा होता है, जिससे यहां हर आयु वर्ग के लोग जुड़ते हैं।
एक समय ऐसा था जब मंदिर की जगह केवल खाली जमीन और एक नाला था, जहां असामाजिक तत्वों का जमावड़ा होता था। लेकिन लोगों ने मिलकर यह निर्णय लिया कि यहां एक धार्मिक स्थल होना चाहिए। पहले एक छोटा शिवलिंग था, जिस पर चांदी मढ़ी हुई थी, लेकिन पांच साल पहले चोरों ने मंदिर में घुसकर शिवलिंग को खंडित कर दिया। इसके बाद सभा ने 28 इंच का नया नर्मदेश्वर शिवलिंग स्थापित किया। साथ ही मंदिर में अब हर शाम योग सत्र भी आयोजित होते हैं।