चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: चंडीगढ़ में किसानों की महापंचायत का आयोजन आज सेक्टर-43बी में हुआ, जिसमें पंजाब सहित देशभर से हजारों किसान शामिल हुए। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के आह्वान पर आयोजित इस महापंचायत का मुख्य उद्देश्य किसानों के पांच साल के आंदोलन की याद दिलाना और अपनी लंबित मांगों को केंद्र और राज्य सरकार के समक्ष पेश करना था। अनुमान है कि इस मौके पर लगभग 10 हजार किसानों ने हिस्सा लिया।
महापंचायत को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए। सेक्टर-43 में चंडीगढ़ पुलिस और बीएसएफ के जवान तैनात किए गए हैं। किसानों के लिए लंगर और अन्य व्यवस्थाएं भी बनाई गईं। वहीं कुछ किसान शराब के ठेके पर जाकर खरीदारी कर लौटे, जिससे हलचल बनी।
किसानों ने महापंचायत में केंद्र और पंजाब सरकार को अपने मांगपत्र सौंपे। प्रमुख मांगों में सभी फसलों के लिए MSP की कानूनी गारंटी, पंजाब को चंडीगढ़ पर अधिकार, पंजाब यूनिवर्सिटी का दर्जा बहाल करना और राज्य के जल संसाधनों पर हक सुनिश्चित करना शामिल हैं। इसके अलावा बिजली संशोधन विधेयक 2025 को रद्द करने, बाढ़ प्रभावित किसानों की मदद और गन्ना उत्पादक किसानों के भुगतान की भी मांग रखी गई।
किसान नेता हरिंदर सिंह लक्खोवाल ने कहा कि केंद्र के नए चार श्रम कोड मजदूर विरोधी हैं और इनसे न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा पर असर पड़ेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार किसानों और मजदूरों की मांगों को नजरअंदाज करती रही, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। महापंचायत में पूरे पंजाब से बीकेयू लक्खोवाल के बड़े जत्थे शामिल हुए, जो किसान संगठनों की एकजुटता का मजबूत संदेश दे रहे हैं।