चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: पीजीआई के डॉक्टरों ने एक ऐसी सर्जरी कर दिखाई है, जिसे चिकित्सा जगत में मील का पत्थर कहा जा सकता है। 43 साल के एक शख्स की रोबोटिक वेसोवासोस्टॉमी सर्जरी करके उसे दोबारा पिता बनने का मौका दिया गया है। खास बात यह रही कि इस व्यक्ति ने कुछ साल पहले नसबंदी करवा ली थी, लेकिन अब वह दोबारा संतान की इच्छा रखता था। डॉक्टरों ने पहली बार इस सर्जरी को रोबोटिक तकनीक से कर इतिहास रच दिया।
इस प्रक्रिया में रोबोट सिस्टम की मदद से नसबंदी के दौरान कट चुकी बेहद बारीक नसों को दोबारा जोड़ा गया। यह काम बाल से भी पतले टांकों से किया गया, जिसमें बहुत ही बारीक सूई और धागे का इस्तेमाल होता है। डॉक्टरों की टीम ने यह सर्जरी पूरी करने के बाद मरीज को अगले ही दिन अस्पताल से छुट्टी भी दे दी, और वह अब पूरी तरह स्वस्थ है। उनका दावा है कि रोबोटिक तकनीक की वजह से सर्जरी बेहद सटीक होती है और इसमें गलती की संभावना न के बराबर रहती है।
डॉ. आदित्य शर्मा, जिन्होंने इस सर्जरी को लीड किया, उन्होंने बताया कि इस तकनीक से ऑपरेशन अब बहुत आसान और सुरक्षित हो गया है। वहीं, प्रोफेसर रवि मोहन ने भी कहा कि अब रोबोट का इस्तेमाल सिर्फ कैंसर या जटिल रोगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पुरुषों की संतान संबंधी समस्याओं में भी यह कारगर साबित हो रहा है। इस सर्जरी में डॉ. गिरधर बोरा और डॉ. आदित्य प्रकाश शर्मा भी शामिल रहे।
रोबोटिक वेसोवासोस्टॉमी सर्जरी क्या है?
ये एक अत्याधुनिक तकनीक है, जिसमें माइक्रोस्कोप के बजाय रोबोट की सहायता से पुरुषों की शुक्राणु ले जाने वाली नलियों को दोबारा जोड़ा जाता है। यह सर्जरी नसबंदी करवाने के बाद दोबारा संतान की चाह रखने वाले पुरुषों के लिए वरदान साबित हो रही है।