चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी (CREST) के फंड में कथित 75.4 करोड़ रुपये की हेराफेरी के मामले में चार्जशीट दाखिल की है। इसमें CREST के तत्कालीन CEO और भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी नवनीत श्रीवास्तव, एक निजी कंसल्टेंसी कंपनी विपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशक को आरोपी बनाया गया है। CBI के मुताबिक, फंड में कथित गड़बड़ी IDFC फर्स्ट बैंक के खातों के जरिए की गई।
जांच एजेंसी ने आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, सबूत मिटाने, आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, जालसाजी और फर्जी दस्तावेजों को असली बताकर इस्तेमाल करने जैसी धाराओं में कार्रवाई की है। इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिश्वत, आपराधिक कदाचार और अपराध में मदद करने से जुड़े आरोप भी लगाए गए हैं। CBI का आरोप है कि CREST के CEO रहते नवनीत श्रीवास्तव ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर सोसाइटी के पैसों का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया और सरकारी पद पर रहते हुए अवैध लाभ भी लिया।
CBI के मुताबिक, विपम कंसल्टेंसी और उसके निदेशक पर कथित अपराध में मदद करने और साजिश में शामिल होने का आरोप है। एजेंसी का दावा है कि कंपनी को हेराफेरी की गई रकम में से करीब 95 लाख रुपये मिले, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर अचल संपत्ति खरीदने में किया गया। नवनीत श्रीवास्तव को CBI पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। CREST से जुड़े मामले की जांच पहले चंडीगढ़ पुलिस कर रही थी, जिसे बाद में CBI ने अपने हाथ में ले लिया। इस मामले में CBI इससे पहले 13 अन्य आरोपियों के खिलाफ भी चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।
CREST मामला चंडीगढ़ के सेक्टर-32 स्थित IDFC फर्स्ट बैंक शाखा से जुड़े एक बड़े बैंकिंग फ्रॉड से भी जुड़ा है। इसी तरह के एक अलग मामले में हरियाणा सरकार के आठ विभागों और संस्थानों के करीब 504 करोड़ रुपये के फंड को कथित तौर पर फर्जी और अस्तित्वहीन एफडी और धोखाधड़ी वाले डेबिट ट्रांजैक्शन के जरिए निकालने का आरोप है, जिसमें अब तक 37 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। वहीं, चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी और नगर निगम से जुड़े तीसरे मामले को भी CBI ने अपने हाथ में लिया है, जिसमें करीब 78 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले में सात आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है।