चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: चंडीगढ़ में सरकारी ठेके हासिल करने के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और अधिकारियों के साथ मिलीभगत की शिकायत पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने शुक्रवार को चार आउटसोर्सिंग कंपनियों के ठिकानों पर छापेमारी की। ये छापे सेक्टर-34, डडूमाजरा और मनीमाजरा में मारे गए। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि एक ही परिवार के सदस्य इन चारों कंपनियों को चलाते हैं और सरकारी ठेके लेने के लिए दस्तावेजों में हेरफेर करते हैं। इन कंपनियों के हजारों कर्मचारी कथित तौर पर केंद्र शासित प्रदेश (यूटी) के अलग-अलग विभागों में काम कर रहे हैं। शुक्रवार शाम तक सीबीआई ने इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की थी और न ही एजेंसी की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया था।
शिक्षा विभाग ग्रुप-डी कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष रंजीत मिश्रा ने यह शिकायत दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि चारों कंपनियां दो भाइयों और उनकी बहन द्वारा चलाई जा रही हैं। मिश्रा ने शिकायत में कहा कि ये कंपनियां चंडीगढ़ में सरकारी काम करती हैं और टेंडर हासिल करने के लिए विभागों के प्रमुखों व दूसरे अधिकारियों के साथ मिलीभगत करती हैं। आरोप है कि इसके बदले अधिकारियों को अवैध रूप से पैसे दिए जाते हैं।
GeM पोर्टल पर फर्जी दस्तावेज अपलोड करने का आरोप
रंजीत मिश्रा के मुताबिक, कंपनियां सरकारी अधिकारियों की कथित मिलीभगत से सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल पर फर्जी दस्तावेज अपलोड कर टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी करती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि रिश्वत के बदले कंपनियों को ठेके दिए जाते हैं। शिकायत मिलने पर अधिकारी कथित तौर पर GeM के नियमों का हवाला देकर मामले को दबा देते हैं। मिश्रा का दावा है कि चंडीगढ़ प्रशासन के तहत मैनपावर सेवाओं से जुड़े करीब 70 प्रतिशत टेंडर इन्हीं चार कंपनियों को दिए जा रहे हैं।
शिकायत में एक उदाहरण धनास स्थित गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल का भी दिया गया है। मिश्रा के अनुसार, यहां मैनपावर उपलब्ध कराने का ठेका इन कंपनियों में से एक को मिला था। कंपनी ने अपने अनुभव के प्रमाण के तौर पर भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) का एक सर्टिफिकेट पेश किया था। इसमें 1 मार्च 2023 से 31 मार्च 2024 तक मैनपावर उपलब्ध कराने का दावा किया गया था। मिश्रा ने आरोप लगाया कि कंपनी ने इस अवधि में BEL को कोई मैनपावर उपलब्ध नहीं कराई थी। उनके मुताबिक, आरटीआई के जवाब में भी इसकी पुष्टि हुई थी।
समाज कल्याण विभाग और कॉलेज के टेंडर पर भी सवाल
मिश्रा ने शिकायत में यूटी के समाज कल्याण विभाग से जुड़े एक अन्य ठेके का भी जिक्र किया। उनका आरोप है कि इस ठेके को हासिल करने के लिए दूसरी कंपनी ने फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया। शिकायत के मुताबिक, कंपनी ने 5 अगस्त 2022 की तारीख वाला एक अनुभव प्रमाणपत्र पेश किया था, जिसमें दावा किया गया था कि उसने थापर यूनिवर्सिटी को मैनपावर सेवाएं दी थीं। मिश्रा ने आरोप लगाया कि उस प्रमाणपत्र पर मनजीत सिंह के हस्ताक्षर उनकी जानकारी के बिना डिजिटल तरीके से इस्तेमाल किए गए।
सेक्टर-42 स्थित पोस्ट ग्रेजुएट गवर्नमेंट कॉलेज फॉर गर्ल्स के टेंडर को लेकर भी शिकायत में सवाल उठाए गए हैं। मिश्रा के मुताबिक, इस टेंडर में 195 कंपनियों ने हिस्सा लिया था, लेकिन इनमें से केवल तीन कंपनियों को योग्य घोषित किया गया। उनका दावा है कि ये तीनों कंपनियां उसी भाई-बहन के समूह से जुड़ी थीं और इन्हें ही ठेका मिला। शिकायत में कहा गया है कि बाकी कंपनियों को ईएमपी प्रमाणपत्र जमा नहीं करने के आधार पर अयोग्य घोषित कर दिया गया था।