चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने वर्ष 2026-27 के लिए समग्र शिक्षा योजना के तहत चंडीगढ़ के स्कूल शिक्षा क्षेत्र को 144.72 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। यह राशि पिछले वर्ष के 144.2 करोड़ रुपये से थोड़ी अधिक है, लेकिन चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा मांगे गए 170.1 करोड़ रुपये से काफी कम है। वहीं, पहले से स्वीकृत 4.45 करोड़ रुपये की परियोजनाएं अब भी अधूरी हैं, जिससे उनके क्रियान्वयन पर सवाल उठ रहे हैं।
प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड (PAB) के रिकॉर्ड के अनुसार, गैर-आवर्ती गतिविधियों से जुड़ी 4.45 करोड़ रुपये की अधूरी परियोजनाएं इस वित्त वर्ष में भी लंबित हैं। पहले कुल 6.2 करोड़ रुपये की परियोजनाएं स्वीकृत हुई थीं, लेकिन अब तक केवल 1.1 करोड़ रुपये के कार्य ही पूरे हो सके हैं। सबसे अधिक लंबित कार्य माध्यमिक शिक्षा से जुड़े हैं, जिनकी लागत 4.1 करोड़ रुपये से अधिक है।
अधूरी परियोजनाओं में आईसीटी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, विद्या समीक्षा केंद्र, प्रारंभिक बाल शिक्षा सुविधाएं, शिक्षक संसाधन पैकेज और SCERT से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं। पिछले वर्ष भी शिक्षा मंत्रालय ने 2024 में स्वीकृत 32 आईसीटी लैब समय पर पूरी न होने पर चंडीगढ़ प्रशासन को फटकार लगाई थी। 2025-26 में डिजिटल और आईसीटी परियोजनाओं के लिए स्वीकृत 4.3 करोड़ रुपये में से समीक्षा के समय तक केवल करीब 70 लाख रुपये ही खर्च किए गए थे।
वर्ष 2026-27 के लिए स्वीकृत बजट में 130.9 करोड़ रुपये प्राथमिक शिक्षा, 13.07 करोड़ रुपये माध्यमिक शिक्षा और 50 लाख रुपये शिक्षक शिक्षा के लिए निर्धारित किए गए हैं। यह राशि शिक्षकों के वेतन, बुनियादी साक्षरता, समावेशी एवं व्यावसायिक शिक्षा, स्कूल अनुदान, शिक्षक प्रशिक्षण और शिक्षा की गुणवत्ता सुधार कार्यक्रमों पर खर्च की जाएगी। साथ ही मंत्रालय ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को लंबित परियोजनाएं समयबद्ध तरीके से पूरी करने और उनकी प्रगति नियमित रूप से अपडेट करने के निर्देश दिए हैं।