चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: चंडीगढ़ में सीबीआई की विशेष अदालत ने भ्रष्टाचार के आठ साल पुराने मामले में इंजीनियरिंग विभाग, सेक्टर-9 में बिल असिस्टेंट के पद पर काम करने वाले फतेह सिंह को दोषी ठहराया है। अदालत ने उसे चार साल की सश्रम कैद की सजा सुनाई और 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। यह मामला पेंशन के बकाया भुगतान से जुड़े बिल तैयार करने के बदले रिश्वत मांगने का था।
सीबीआई ने राजिंदर कुमार की लिखित शिकायत के आधार पर फतेह सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 और 13(2) के साथ धारा 13(1)(डी) के तहत केस दर्ज किया था। शिकायत में बताया गया था कि राजिंदर कुमार के पिता धन सिंह चंडीगढ़ के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में राजमिस्त्री थे और 31 जुलाई 2010 को रिटायर हुए थे। 19 जनवरी 2014 को उनकी मौत के बाद उनकी पेंशन राजिंदर कुमार की मां के भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) खाते में आने लगी।
इस बीच, पीडब्ल्यूडी कर्मचारियों की पदोन्नति से जुड़ा एक मामला हाई कोर्ट में चल रहा था, जिसमें धन सिंह समेत कर्मचारियों के पक्ष में फैसला आया। इसके बाद धन सिंह की पेंशन में संशोधन किया गया और बढ़ी हुई पेंशन का बकाया उनकी पत्नी को मिलना था। इस रकम से जुड़े बिल तैयार कराने के लिए राजिंदर कुमार इंजीनियरिंग विभाग के कार्यालय में फतेह सिंह से मिले, क्योंकि बिल बनाने का काम उसी के पास था। आरोप है कि फतेह सिंह बार-बार काम में देरी की बात कहता रहा और बाद में बिल तैयार करने के बदले कम से कम 4,000 रुपये रिश्वत मांगी।
राजिंदर कुमार रिश्वत नहीं देना चाहते थे, इसलिए उन्होंने सीबीआई से शिकायत की। इसके बाद सीबीआई ने जाल बिछाया और 6 जून 2018 को फतेह सिंह को शिकायतकर्ता से 3,500 रुपये की रिश्वत मांगते और लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया। शुरुआती तौर पर मामला बनता देख अदालत ने फतेह सिंह के खिलाफ आरोप तय किए। हालांकि, उसने खुद को निर्दोष बताते हुए मुकदमे का सामना करने की बात कही।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि फतेह सिंह को झूठा फंसाया गया है। उसके वकील ने कहा कि बिल पहले ही तैयार किए जा चुके थे और आरोपी के पास ऐसा कोई काम लंबित नहीं था, जिसके लिए वह रिश्वत मांगता। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि बिल तय नियमों के अनुसार तैयार करने की प्रक्रिया से नाराज होकर शिकायतकर्ता ने झूठी शिकायत दर्ज कराई थी।
वहीं, सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक नरेंद्र सिंह ने दलील दी कि अभियोजन पक्ष ने आरोपों को संदेह से परे साबित कर दिया है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फतेह सिंह को दोषी करार दिया और उसे चार साल की सश्रम कैद तथा 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।