चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ की फर्नीचर मार्केट से हटाए गए दुकानदारों के मामले में प्रशासन को फटकार लगाते हुए जवाब तलब किया है। कोर्ट ने कहा कि सभी दुकानदार फर्जी नहीं हो सकते, कुछ लोग पिछले 40-45 वर्षों से वहीं व्यापार कर रहे हैं। हाईकोर्ट ने प्रशासन के 9 जनवरी 2025 के आदेश को रद्द कर दिया और निर्देश दिया कि दुकानदारों के दावों की जांच कर पुनर्वास पर विचार किया जाए।
यह मामला जसविंदरपाल सिंह बनाम यूटी चंडीगढ़ केस के तहत जस्टिस दीपक सिब्बल और जस्टिस लपीता बनर्जी की डबल बेंच के समक्ष आया। दुकानदारों की ओर से सीनियर वकील अक्षय भान ने दलील दी कि अचानक कार्रवाई से वे बेरोजगार हो गए हैं और सेक्टर-56 की बल्क मार्केट में पुनर्वास की मांग की। प्रशासन ने उन्हें अवैध कब्जाधारी बताया और कहा कि सेक्टर-56 की मार्केट अभी कागजों पर ही है।
प्रशासन ने 20 जुलाई को कार्रवाई करते हुए मार्केट की दुकानों को तोड़ दिया था। कारोबारियों का कहना है कि वे साल 2002 से पहले वहां किराए पर थे और जमीन के मालिकों को किराया दिया करते थे। जब प्रशासन ने जमीन अधिग्रहण की, तो उन्हें इसकी जानकारी नहीं दी गई और ना ही पुनर्वास का कोई ठोस प्रस्ताव दिया गया। जनवरी में हुई एक बैठक में पुनर्वास का मौखिक आश्वासन दिया गया था, लेकिन उसके बाद कोई कदम नहीं उठाया गया।
चंडीगढ़ डीसी निशांत यादव के मुताबिक, यह जमीन करीब 400 करोड़ रुपए की है और अब इसे इंजीनियरिंग विभाग को सौंपा गया है ताकि शहर की विकास योजनाओं में उपयोग किया जा सके। प्रशासन का तर्क है कि यह जमीन शहर के तीसरे चरण के विस्तार का अहम हिस्सा है, मगर कोर्ट ने दुकानदारों के अधिकारों और आजीविका के सवाल पर प्रशासन को नया प्लान बनाने के निर्देश दिए हैं।