चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: चंडीगढ़ में हर साल पढ़ाई और नौकरी के लिए हजारों युवा पहुंचते हैं और उनके लिए पीजी अक्सर शहर में पहला ठिकाना बनता है। लेकिन सुविधा के साथ अब कई तरह की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। बिना रजिस्ट्रेशन चल रहे पीजी, छोटे कमरों में ज्यादा लोगों को रखना, सफाई की कमी, खाने की गुणवत्ता, आने-जाने पर पाबंदी और सिक्योरिटी डिपॉजिट को लेकर छात्रों और दूसरे लोगों ने सवाल उठाए हैं।
पीजी की लापरवाही से जुड़े मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। फरवरी 2020 में सेक्टर 32-डी के एक कथित अनरजिस्टर्ड पीजी में आग लगने से तीन युवतियों रिया, पाखी ग्रोवर और मुस्कान की मौत हो गई थी, जबकि दो अन्य घायल हुई थीं। बताया गया था कि बड़ी संख्या में लड़कियों को रखने के लिए मकान में पार्टिशन किए गए थे। बाद में कोर्ट रिकॉर्ड में बिना अनुमति बदलाव और सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने से जुड़े आरोपों का उल्लेख हुआ। सितंबर 2026 में चंडीगढ़ की एक अदालत ने मकान मालिक और पीजी संचालक के खिलाफ आईपीसी की धारा 304-ए के तहत लापरवाही से मौत का मामला चलाने के लिए आरोप तय किए।
शहर के सेक्टर 15, 36 और 37 में की गई पड़ताल में ऐसे कई पीजी मिले, जो उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड में नजर नहीं आए। सेक्टर 37-डी में दो जुड़े हुए तीन मंजिला मकानों में पीजी चलता मिला। कुछ कमरों में तय 50 वर्गफुट प्रति व्यक्ति के मानक से कम जगह में लोगों को रखा जा रहा था। कुछ छात्राओं ने बताया कि छह से सात लड़कियों के लिए एक ही वॉशरूम है। सेक्टर 36-बी में भी दो मकानों में पीजी चल रहा था, जबकि नियमों के मुताबिक मालिक या लीज पर लेने वाले व्यक्ति का उसी मकान में रहना जरूरी है। रहने वालों के मुताबिक मालिक सामने किराए के मकान में रहते हैं। सेक्टर 15 में भी कुछ कमरों में तय संख्या से ज्यादा लोगों के रहने की बात सामने आई।
पीजी में रहने वाले छात्रों ने खाने की गुणवत्ता और साफ-सफाई को लेकर भी शिकायतें बताई हैं। कुछ छात्राओं ने रात में लौटने की तय समय सीमा की बात कही, जिसमें 9 बजे तक वापस आने का नियम बताया गया। सिक्योरिटी डिपॉजिट को लेकर भी कई लोगों ने आरोप लगाया कि बिना स्पष्ट जानकारी के रकम काट ली जाती है या घर खाली करने के बाद पैसा लौटाने में देरी होती है। पीजी नीति के तहत रजिस्टर रखने और उसे चंडीगढ़ प्रशासन की वेबसाइट पर उपलब्ध कराने का प्रावधान है, लेकिन पड़ताल में कोई पूरी और अपडेट सार्वजनिक सूची नहीं मिली। डिप्टी कमिश्नर निशांत कुमार यादव ने कहा कि प्रशासन मौजूदा पीजी नियमों को ज्यादा प्रभावी और व्यावहारिक बनाने पर काम कर रहा है और निरीक्षण के बाद नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।