चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: चंडीगढ़ प्रशासन सौर ऊर्जा को अगले स्तर तक ले जाने की तैयारी में है। सरकारी इमारतों की छतों पर तो पहले ही सोलर पैनल लगाए जा चुके हैं, लेकिन अब जगह की कमी को देखते हुए एक नया और अनोखा कदम उठाया जा रहा है—शहर के 220 किमी लंबे साइकिल ट्रैकों पर सोलर पैनल लगाने की योजना। इसके लिए चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी (CREST) इन ट्रैकों का अध्ययन कर रही है ताकि यह तय किया जा सके कि कहां और कितनी क्षमता के पैनल लगाए जा सकते हैं।
योजना के मुताबिक, इन ट्रैकों पर शेड बनाकर उसके ऊपर सोलर पैनल लगाए जाएंगे, जिससे धूप से बिजली भी बनेगी और ट्रैक पर चलने वालों को छाया भी मिलेगी। पहले ही वाटर वर्क्स, धनास लेक और डीसी मॉल पार्किंग जैसे कई स्थानों पर सोलर पैनल लगाए जा चुके हैं, लेकिन प्रशासन का लक्ष्य है कि 2030 तक शहर की पूरी बिजली जरूरत नवीकरणीय ऊर्जा से पूरी की जाए। इसके लिए नगर निगम की 90 बिल्डिंगों, प्रशासन की खाली जमीन और बड़े पार्किंग स्थलों को भी चिह्नित किया जा रहा है।
फिलहाल चंडीगढ़ में सरकारी स्थलों पर 18.1 मेगावाट पीक क्षमता के सोलर पैनल लगे हैं, जो सालाना लगभग 23.5 मिलियन यूनिट बिजली पैदा कर रहे हैं। इससे हर साल करीब 12.69 करोड़ रुपये की बचत हो रही है। बीते एक दशक में शहर में सौर ऊर्जा उत्पादन की क्षमता 15 गुना बढ़ी है—2014-15 में जहां यह सिर्फ 5.31 मेगावाट थी, वहीं 2024-25 में यह 78.85 मेगावाट तक पहुंच चुकी है। इससे अब तक करीब 1.86 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आई है।
चंडीगढ़ को हाल ही में केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने 2030 तक सोलर सिटी के रूप में विकसित किए जाने वाले 34 शहरों की सूची में शामिल किया है। CREST के प्रयासों से न केवल हरित ऊर्जा उत्पादन बढ़ रहा है, बल्कि शहर की पहचान एक पर्यावरण-हितैषी और आधुनिक सिटी के रूप में भी मजबूत हो रही है। अगर यह योजना सफल हुई, तो चंडीगढ़ देश का पहला ऐसा शहर बन सकता है जहां साइकिल ट्रैकों से भी बिजली बनेगी।