चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: चंडीगढ़ में व्यापारियों और प्रशासन के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। शहर में पुराने बिल्डिंग बायलॉज और वॉयलेशन, मिसयूज नोटिसों की भरमार ने 40 हजार से अधिक व्यापारियों को परेशान कर दिया है। व्यापार के लिए पाबंदियों और नोटिसों के कारण कई कारोबारियों का रुख अब पंचकूला और मोहाली की ओर बढ़ रहा है। 50 साल पुराने नियम और उनके अनुसार वसूले जा रहे करोड़ों रुपए के जुर्माने ने व्यापारियों की स्थिति और कठिन बना दी है।
व्यापारियों की मांग है कि प्रशासन “नीड बेस्ड चेंज” नीति लागू करे। वर्तमान में शोरूम या दुकानों में किए छोटे बदलाव पर भी नोटिस भेजा जाता है और जुर्माना लगाया जाता है। साथ ही, शहर में बूथों के ऊपर स्टोरेज की अनुमति नहीं होने से व्यापारियों को स्टॉक रखने और बेचने में दिक्कत हो रही है। पुराने वैट नोटिसों का समाधान भी लंबित है, जिसमें 8 हजार व्यापारी करोड़ों रुपये का बकाया चुकाने को मजबूर हैं। व्यापारियों का कहना है कि पंजाब और हरियाणा की तरह वन टाइम सेटलमेंट स्कीम लागू की जाए।
शॉप कम फ्लैट (एससीएफ) को शॉप कम ऑफिस (एससीओ) में बदलने के मामले में भी व्यापारी असंतुष्ट हैं। वर्तमान नियमों के तहत पहली मंजिल पर व्यापार करना मुमकिन नहीं है, जबकि व्यापारियों का कहना है कि इसमें बदलाव होना चाहिए। जुर्माना राशि भी पहले 10 रुपये प्रति वर्ग फुट थी, अब यह 500 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गई है। प्रशासन इसके लिए केंद्र की मंजूरी की बात करता है, जबकि इसे स्थानीय स्तर पर ही बढ़ाया गया था।
व्यापारियों का सुझाव है कि पुराने बिल्डिंग बायलॉज के मामलों के निपटारे के लिए एस्टेट ऑफिस के तहत एक कमेटी बनाई जाए। इसमें शहर के हर वर्ग का प्रतिनिधि शामिल हो, जैसे आरडब्ल्यूए, सीएचबी हाउसिंग, इंडस्ट्रीज और ट्रेडर्स। कमेटी बिल्डिंग बायलॉज में जरूरी संशोधन पर सुझाव दे और प्राथमिकता के आधार पर नोटिसों का समाधान करे। तब तक नए नोटिस देने पर रोक लगनी चाहिए और पुराने नोटिसों को समयबद्ध तरीके से निपटाया जाना चाहिए।