चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: पंजाब विश्वविद्यालय (पीयू) के प्रोफेसर भारत भूषण गोयल को पत्नी सीमा गोयल की हत्या के मामले में एक बार फिर राहत नहीं मिली है। स्थानीय अदालत ने उनकी दूसरी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है।
बचाव पक्ष ने दलील दी थी कि जांच निष्पक्ष नहीं हुई, हत्या से जोड़ने वाला कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं है और उनकी बेटी डॉ. पारुल गोयल अदालत में गवाही दे चुकी हैं, इसलिए मुख्य गवाह को प्रभावित करने की कोई संभावना नहीं है।
हालांकि, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डॉ. हरप्रीत कौर ने बुधवार को जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि बेटी की गवाही को मामले में परिस्थितियों में बड़ा बदलाव नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि प्रोफेसर गोयल की पहली जमानत याचिका मार्च में गुण-दोष के आधार पर पहले ही खारिज की जा चुकी है।
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के विरुपाक्षप्पा गौड़ा बनाम कर्नाटक राज्य (2017) फैसले का हवाला देते हुए कहा कि चार्जशीट दाखिल होने का मतलब यह नहीं है कि अभियोजन पक्ष का मामला कमजोर हो गया है, बल्कि यह दर्शाता है कि जांच एजेंसी को मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सामग्री मिली है।
यह मामला 4 नवंबर 2021 का है। प्रोफेसर गोयल ने खुद पुलिस को सूचना दी थी कि उनकी पत्नी सीमा गोयल पंजाब विश्वविद्यालय परिसर स्थित घर में बंधी और बेहोश मिली हैं। उन्हें सेक्टर-16 स्थित सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। उस समय प्रोफेसर गोयल ने दावा किया था कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने घर में घुसकर उनकी पत्नी की हत्या की है।
जांच के दौरान केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (CFSL) की रिपोर्ट में सामने आया कि घर का लोहे का जालीदार दरवाजा अंदर से बाहर की ओर काटा गया था, जिससे जबरन घुसपैठ की कहानी पर सवाल खड़े हुए। इसके अलावा पुलिस ने BEOS प्रोफाइलिंग रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर 8 दिसंबर 2025 को प्रोफेसर गोयल को गिरफ्तार किया। इस साल 2 मार्च को चार्जशीट दाखिल की गई और 11 मई को अदालत ने उनके खिलाफ आरोप तय किए।
अदालत ने कहा कि BEOS रिपोर्ट की स्वीकार्यता और उसके साक्ष्य मूल्य पर फैसला ट्रायल के दौरान किया जाएगा। हत्या जैसे गंभीर आरोप और मामले में परिस्थितियों में कोई बड़ा बदलाव न होने के कारण नियमित जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता।