चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: चंडीगढ़ के डडूमाजरा लैंडफिल को लेकर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने नगर निगम से साफ जवाब मांगा है। बुधवार को चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की बेंच ने नगर निगम कमिश्नर से एक हलफनामा दाखिल करने को कहा है। इसमें शहर की कचरा प्रोसेसिंग क्षमता की जानकारी देने के साथ यह भी बताना होगा कि चंडीगढ़ का कचरा किसी दूसरी जगह, खासकर पंजाब या हरियाणा में, नहीं डाला जा रहा है।
सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से सीनियर एडवोकेट गौरव मोहंता ने बताया कि डडूमाजरा प्लांट की अपग्रेडेड क्षमता करीब 450 टन प्रतिदिन है। रोजाना करीब 200 टन गीला और 100 टन सूखा कचरा मिल रहा है, यानी मौजूदा क्षमता से कम। निगम के मुताबिक गीला और सूखा कचरा पहले ही हटाया जा चुका है और अब करीब 7,000 मीट्रिक टन मिश्रित कचरा बचा है, जिसे जल्द साफ करने की बात कही गई है।
वहीं याचिकाकर्ता और वकील अमित शर्मा ने नगर निगम के दावों पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि डडूमाजरा में कचरे का ढेर कम जरूर हुआ है, लेकिन समस्या खत्म नहीं हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कचरे को चंडीगढ़ के अलावा पंजाब और हरियाणा की दूसरी जगहों पर भी ले जाकर डंप किया जा रहा है। शर्मा ने यह भी कहा कि कचरा निपटाने की समयसीमा पहले 2022, फिर 2024 और अब 2026 तक बढ़ाई गई, लेकिन स्थायी समाधान को लेकर अभी भी स्थिति साफ नहीं है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि सिर्फ डडूमाजरा से कचरा हटाकर किसी दूसरी जगह डालना समाधान नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने नगर निगम को एक हफ्ते के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें कचरा प्रोसेसिंग की सही क्षमता, मौजूदा डंप को साफ करने में लगने वाला समय और यह स्पष्ट करना होगा कि चंडीगढ़ में पैदा होने वाला पूरा कचरा निगम की अपनी सुविधा में ही प्रोसेस किया जा रहा है। मामले की अगली सुनवाई अगले गुरुवार को होगी।