चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अमृतसर और चंडीगढ़ में इलाज कराने जाने वाले मरीजों और उनके परिजनों के लिए ठहरने की व्यवस्था के विस्तार की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि अमृतसर में राज्य की वर्षों से उपेक्षित पुरानी हेरिटेज गेस्ट हाउस इमारत का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। इसके अलावा, परिसर के पीछे खाली पड़ी जमीन पर एक नया ब्लॉक भी बनाया जाएगा, जिसमें कमरे, डॉर्मिट्री और सुइट्स शामिल होंगे। यह पहल अमृतसर में किफायती आवास तलाशने वाले मरीजों की सुविधा के लिए की जा रही है।
इसी तरह की एक नई सुविधा चंडीगढ़ के सेक्टर 17 में स्थित जम्मू-कश्मीर सरकार की संपत्ति पर भी विकसित की जा रही है। यह व्यवस्था मुख्य रूप से पीजीआईएमईआर (PGIMER) और चंडीगढ़ के अन्य प्रमुख अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए मददगार साबित होगी। इस दौरान उमर अब्दुल्ला ने लद्दाख के नेताओं को भी अहम सलाह दी कि वे केंद्र सरकार से मौखिक आश्वासनों के बजाय लिखित और कानूनी रूप से बाध्यकारी वादे ही स्वीकार करें।
इसके साथ ही डिजिटल लेनदेन और यूपीआई (UPI) शुल्कों पर जारी बहस पर अपनी बात रखते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि आम उपभोक्ताओं को अतिरिक्त वित्तीय बोझ से बचाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पर्सन-टू-पर्सन (व्यक्ति से व्यक्ति) फंड ट्रांसफर बिल्कुल मुफ्त होना चाहिए, हालांकि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के रखरखाव लागत को देखते हुए व्यावसायिक कंपनियों पर शुल्क लगाने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।
जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि वर्ष 2019 में अनुच्छेद 370 के हटने के बाद क्षेत्र में उम्मीद के मुताबिक भारी निवेश नहीं आ सका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण पंजाब जैसे बड़े औद्योगिक मॉडल की नकल नहीं कर सकता। इसलिए राज्य सरकार अब भारी उद्योगों के बजाय स्थानीय संसाधनों पर आधारित कृषि, बागवानी, एग्रो-प्रोसेसिंग और डेयरी जैसे मजबूत क्षेत्रों में निवेश और रोजगार बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करेगी।