चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने कहा है कि न्यायिक बुनियादी ढांचा कोई विलासिता नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था की बुनियादी जरूरत है। उन्होंने कहा कि जो वकील पार्किंग की चिंता में उलझा हो, उससे अदालत में पूरी एकाग्रता के साथ बहस, गवाहों से जिरह या कानूनी दस्तावेज तैयार करने की उम्मीद नहीं की जा सकती।
मुख्य न्यायाधीश शनिवार को चंडीगढ़ के सेक्टर-43 स्थित जिला अदालत परिसर में 1,200 कारों और 500 दोपहिया वाहनों की क्षमता वाली मल्टी-लेवल पार्किंग का उद्घाटन कर रहे थे।
इस दौरान उन्होंने चंडीगढ़ को अपनी "कर्मभूमि" बताते हुए कहा कि उनके कानूनी करियर की शुरुआत इसी शहर से हुई थी। उन्होंने कहा, "हिसार मेरा जन्मस्थान हो सकता है, लेकिन चंडीगढ़ मेरी कर्मभूमि है। संघर्ष से सफलता तक का मेरा सफर इसी शहर से शुरू हुआ।"
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि न्यायालयों में आने वाले अधिकांश लोग मानसिक तनाव में होते हैं, इसलिए उन्हें कम से कम बुनियादी सुविधाएं मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अदालतों का विकास अस्पतालों की तर्ज पर होना चाहिए, जहां हर व्यक्ति को आवश्यक सुविधाएं आसानी से उपलब्ध हों।
उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे को कभी भी अनावश्यक खर्च नहीं समझना चाहिए। यह किसी भी शहर और समाज की रीढ़ होता है। पर्याप्त सुविधाओं के बिना किसी भी शहर का सुचारु संचालन संभव नहीं है।
मुख्य न्यायाधीश ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में पार्किंग और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी का भी जिक्र किया। उन्होंने चंडीगढ़ प्रशासन से हाईकोर्ट के विस्तार, वकीलों के लिए अतिरिक्त चैंबर और स्थायी पार्किंग व्यवस्था पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया।
उन्होंने पंजाब और हरियाणा सरकारों से भी जिला और उप-मंडलीय अदालतों में न्यायिक ढांचे को मजबूत करने की अपील की। उनका कहना था कि मुकदमों की संख्या लगातार बढ़ रही है, इसलिए न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति के साथ-साथ नए कोर्टरूम और बेहतर बुनियादी ढांचा भी जरूरी है।
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि यदि पर्याप्त कोर्टरूम नहीं होंगे तो केवल न्यायिक अधिकारियों की भर्ती से समस्या का समाधान नहीं होगा। नियुक्तियां और बुनियादी ढांचे का विकास साथ-साथ होना चाहिए, ताकि मामलों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित किया जा सके।