चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार को चंडीगढ़ में पंजाब की पुरानी सरकारों पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि पहले यहां वसूली सिस्टम का बोलबाला था, जिसमें बिना पैसे दिए उद्योगपतियों को कोई मंजूरी नहीं मिलती थी। इस वजह से उद्योग पंजाब से पलायन कर गए और युवाओं के पास रोजगार के अवसर नहीं बचे। बेरोजगारी के चलते कई युवा नशे की दलदल में फंस गए। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार को इस सिस्टम को खत्म करने में तीन साल लग गए, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं।
केजरीवाल ने बताया कि पहले उद्योगपतियों को जानबूझकर परेशान किया जाता था—कभी उनके कारखानों के सामने फ्लाईओवर बना दिए जाते थे, तो कभी बेवजह फाइलें रोकी जाती थीं। मगर अब आम आदमी पार्टी की सरकार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है—कोई भी औद्योगिक मंजूरी 45 दिन के भीतर दे दी जाएगी और 46वें दिन तक न मिले तो वह स्वत: स्वीकृत मानी जाएगी। यह फैसला सिर्फ वही सरकार ले सकती है जिसकी नीयत साफ हो।
उन्होंने यह भी कहा कि अब उन्हें उद्योगपतियों से चंदा नहीं, बल्कि विश्वास चाहिए। उन्होंने दावा किया कि अब पंजाब में ‘इज ऑफ डूइंग बिजनेस’ का माहौल बन गया है और 125 करोड़ तक की एमएसएमई को किसी अप्रूवल की जरूरत नहीं है। उन्होंने बताया कि औद्योगिक नीति अब अफसर और नेता नहीं, बल्कि खुद उद्योगपति तय करेंगे। इसके लिए सेक्टोरियल कमेटियों का गठन किया गया है जो सरकार को सुझाव देंगी।
केजरीवाल ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार से सब्सिडी की मांग न की जाए, क्योंकि उनके पास पैसा नहीं है और लंबे समय तक कोई भी सरकार अनुदान नहीं दे सकती। उन्होंने कहा कि जिस राज्य ने सब्सिडी पर उद्योग खड़े किए, वहां आज हालात खराब हैं। उन्होंने उद्योगपतियों से कहा कि वे इनोवेशन और आत्मनिर्भरता के जरिए उद्योगों को मुनाफे की ओर लेकर जाएं, ताकि राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत हो।