चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: नगर निगम में सब इंस्पेक्टर और इंस्पेक्टर जैसी अहम जिम्मेदारियां अब आउटसोर्स कर्मचारियों के पास हैं। ये कर्मचारी पब्लिक डीलिंग वाले विभाग जैसे एंफोर्समेंट, मेडिकल ऑफिसर ऑफ हेल्थ (MOH) और बीएंडआर संभाल रहे हैं। हालांकि, इन अधिकारियों पर लगातार भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं और रोजाना वसूली के आरोप भी सामने आए हैं। निगम के कर्मचारी विकास ने वीडियो जारी कर बताया कि कुछ इंस्पेक्टर प्रतिमाह छह लाख रुपये वसूलते हैं।
इस मामले में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी ऐसे कर्मचारियों को क्यों दी जा रही है, जो किसी तरह से जवाबदेह नहीं हैं। नियमित कर्मचारियों के पास सेलरी, भत्ते और पेंशन से जुड़ा डर रहता है, जबकि आउटसोर्स कर्मी को निगम केवल बर्खास्त कर सकता है। पहले भी कई इंस्पेक्टरों के एरिया बदल दिए गए थे, लेकिन हालिया वीडियो के बाद फिर से जांच की मांग उठ रही है।
नगर निगम ने वीडियो जारी करने वाले बेलदार विकास समेत 70 बेलदारों के ट्रांसफर कर दिए, लेकिन जिन इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर पर आरोप हैं, उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। सीनियर डिप्टी मेयर जसबीर सिंह बंटी, डिप्टी मेयर तरुणा मेहता और कई पार्षद जांच की गहनता से करने की मांग कर रहे हैं।
पिछले छह साल में आउटसोर्स कर्मचारियों की संख्या दोगुनी से अधिक बढ़ गई है। 2019-20 में 3072 आउटसोर्स कर्मचारी थे, जो 2024-25 में 6965 हो गए। नगर निगम का सबसे बड़ा खर्च स्टाफ के वेतन पर होता है, सालाना 250 करोड़ रुपये से अधिक। मासिक खर्च 75 करोड़ रुपये तक पहुंचता है, जिसमें नियमित कर्मचारियों से ज्यादा वेतन आउटसोर्स कर्मियों को जा रहा है।