चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने शुक्रवार को पंजाब विश्वविद्यालय में तत्काल सेनिट (Senate) चुनाव कराने की मांग करने वाली पक्षों से कहा कि पहले यह सुनिश्चित किया जाए कि “कैंपस में शैक्षणिक गतिविधियाँ सामान्य रूप से चल रही हों।”
मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायाधीश संजीव बेरी की डिवीजन बेंच इस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें लंबे समय से लंबित चुनाव शेड्यूल की अधिसूचना जारी करने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ताओं, जो पूर्व सेनिट सदस्यों में शामिल हैं, ने कहा कि विश्वविद्यालय के दो वैधानिक शासी निकाय – सेनिट और सिंडिकेट – देर 2024 से अस्तित्व में नहीं हैं, जिसके कारण “सभी प्रशासनिक शक्तियाँ” कुलपति के पास चली गई हैं। अदालत को यह भी बताया गया कि विश्वविद्यालय ने चुनाव शेड्यूल चांसलर (भारत के उपराष्ट्रपति) को भेजा था, लेकिन “कोई मंजूरी नहीं मिली”, जबकि पंजाब विश्वविद्यालय अधिनियम में ऐसी मंजूरी की आवश्यकता नहीं है।
यूनिवर्सिटी के छात्रों और फैकल्टी के बीच हो रहे विरोध-प्रदर्शन को इसी निर्वात (administrative vacuum) से जोड़ा गया। वकील ने बताया कि “एक साल की देरी हो चुकी है। दिसंबर 2023 से जून 2024 के बीच छह शेड्यूल भेजे गए। अधिनियम स्वयं निर्धारित करता है कि चुनाव शेड्यूल मतदान से 240 दिन पहले शुरू होना चाहिए।” उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय अधिनियम की धारा 11, 13 और 20 का हवाला देते हुए बताया कि विश्वविद्यालय का प्रबंधन और पर्यवेक्षण सेनिट और सिंडिकेट के अधीन होना चाहिए।
केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) सत्यपाल जैन ने अदालत को बताया कि सरकार ने हाल ही में छात्र विरोधों के बाद सेनिट का पुनर्गठन करने वाली अधिसूचनाएँ वापस ले ली हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय “चुनाव शेड्यूल प्रक्रिया में है” और इसमें बड़ी संख्या में कार्यवाही शामिल है, क्योंकि 3.50 लाख पंजीकृत स्नातक मतदाता पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली और चंडीगढ़ में फैले हुए हैं।