चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने एक अहम मुद्दा उठाते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। इसमें मांग की गई है कि सिख छात्रों को परीक्षा केंद्रों के भीतर कृपाण पहनने की अनुमति दी जाए, क्योंकि यह उनकी धार्मिक आस्था का महत्वपूर्ण प्रतीक है। वीरवार को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ प्रशासन को नोटिस जारी करते हुए पूछा कि धार्मिक स्वतंत्रता और राज्य की सुरक्षा में टकराव होने पर प्राथमिकता किसे दी जाएगी।
एसजीपीसी ने अदालत को बताया कि कृपाण कोई आम हथियार नहीं, बल्कि सिख धर्म का एक पवित्र चिन्ह है जिसे सिख हर समय अपने पास रखते हैं। इसके जवाब में मुख्य न्यायाधीश शील नागू की खंडपीठ ने सवाल उठाया कि परीक्षा हॉल में चाकू जैसी वस्तु की क्या जरूरत है। साथ ही कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि क्या परीक्षा नियमों में कृपाण ले जाने पर कोई स्पष्ट प्रतिबंध है या नहीं। अदालत ने राजस्थान में हुई एक घटना का उल्लेख असंगत बताते हुए कहा कि उस राज्य की घटना का इस क्षेत्र की न्यायिक प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं है।
एसजीपीसी का तर्क है कि विभिन्न उच्च न्यायालयों में ऐसी याचिकाएं लंबित हैं और सिख समुदाय को बार-बार ऐसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने राजस्थान में एक घटना का उदाहरण देते हुए बताया कि एक छात्र को परीक्षा केंद्र में कृपाण पहनकर आने से रोका गया था। सुप्रीम कोर्ट में भी इस मुद्दे को उठाया गया, जहां से निर्देश मिला कि सभी हाईकोर्ट में समान नीतियों को लेकर याचिकाएं दायर की जाएं ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति न दोहराई जाए।
कमेटी ने यह भी स्पष्ट किया कि कृपाण पर कोई कानूनी प्रतिबंध नहीं है और इसे सिख पहचान का अभिन्न हिस्सा माना जाना चाहिए। कोर्ट ने सभी पक्षों से विस्तार से जवाब मांगा है और यह मामला अब धार्मिक स्वतंत्रता बनाम सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे की दिशा में एक अहम मोड़ पर खड़ा है। अदालत के आगामी फैसले से यह तय होगा कि धर्म और सुरक्षा के बीच संतुलन कैसे स्थापित किया जाए।