चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने 2020 के बिजली दर वृद्धि विरोध प्रदर्शन से जुड़े दंगा मामले में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी (आप) के अन्य नेताओं को नोटिस जारी किया है। अदालत ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली चंडीगढ़ प्रशासन की याचिका पर सभी पक्षों से जवाब मांगा है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने मुख्यमंत्री भगवंत मान, हरपाल सिंह चीमा, गुरमीत सिंह, मीत हेयर, बलजिंदर कौर, अमन अरोड़ा समेत अन्य नेताओं को नोटिस जारी किया।
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने दलील दी कि हाईकोर्ट का आदेश पूरी तरह गलत है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान गैरकानूनी जमावड़ा था, हिंसा हुई, पुलिसकर्मी घायल हुए और प्रथम दृष्टया अपराध बनता है। उनका कहना था कि भले ही किसी नेता ने खुद हिंसक कार्रवाई न की हो, लेकिन गैरकानूनी जमावड़े का सदस्य होने के नाते उसकी जिम्मेदारी बनती है।
इससे पहले 16 जुलाई की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने शुरुआती तौर पर हस्तक्षेप करने में अनिच्छा जताई थी। वहीं 21 जुलाई को अदालत ने कहा था कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई आरोप नहीं है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान या अन्य नेताओं ने प्रदर्शनकारियों को हिंसा के लिए उकसाया था।
यह मामला 10 जनवरी 2020 का है, जब चंडीगढ़ में बिजली दरों में बढ़ोतरी के विरोध में आम आदमी पार्टी ने प्रदर्शन किया था। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की, पुलिसकर्मियों से धक्का-मुक्की की और वॉटर कैनन चलाए जाने के बाद पथराव किया, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 29 नवंबर 2025 को एफआईआर, चार्जशीट और पूरी आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि उस समय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 लागू नहीं थी, इसलिए प्रदर्शन रोकने का कोई आधार नहीं था। अदालत ने यह भी कहा कि किसी भी आरोपी नेता के खिलाफ हिंसा के लिए उकसाने या पथराव करने के स्पष्ट आरोप या सबूत नहीं हैं।
अब सुप्रीम कोर्ट चंडीगढ़ प्रशासन की अपील पर मामले की सुनवाई करेगा।