चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ में दो फैमिली कोर्ट स्थापित करने की दिशा में अहम कदम उठाया है। हाईकोर्ट की ओर से दाखिल अनुपालन हलफनामे में बताया गया कि 4 अप्रैल 2025 को हुई कोर्ट क्रिएशन कमेटी की बैठक में चंडीगढ़ में पारिवारिक मामलों की सुनवाई के लिए कम से कम दो अदालतें बनाने का फैसला लिया गया था। इनके साथ जरूरी सहायक स्टाफ की व्यवस्था भी की जानी है।
यह मामला मोहाली की पीपल्स वेलफेयर सोसाइटी की ओर से दाखिल जनहित याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता की ओर से वकील कंवर पहल सिंह ने मांग की है कि चंडीगढ़ प्रशासन फैमिली कोर्ट्स एक्ट, 1984 के तहत जरूरी कदम उठाए और जिला अदालत परिसर में फैमिली कोर्ट स्थापित करे। याचिका में एक जिला एवं सत्र न्यायाधीश स्तर के न्यायिक अधिकारी के पद के साथ जरूरी स्टाफ को मंजूरी देने की भी मांग की गई थी।
हाईकोर्ट ने 6 अक्टूबर 2017 को ही चंडीगढ़ में एक फैमिली कोर्ट बनाने का फैसला प्रशासन को बताया था और जरूरी नोटिफिकेशन जारी करने के साथ न्यायिक अधिकारी व सहायक कर्मचारियों के पदों को मंजूरी देने को कहा था। इसके बाद 2018 से अलग-अलग समय पर करीब 11 पत्र भेजकर प्रशासन से नोटिफिकेशन जारी करने का अनुरोध किया गया, लेकिन मामला लंबित रहा। अब 2025 की कमेटी के फैसले के बाद हाईकोर्ट ने 5 अगस्त 2026 को दो न्यायिक अधिकारियों के पद और 40 सहायक कर्मचारियों के पदों के लिए संशोधित चेकलिस्ट प्रशासन को भेजी है।
हलफनामे में कहा गया है कि हाईकोर्ट की तरफ से जरूरी प्रक्रिया पूरी कर दी गई है। अब चंडीगढ़ प्रशासन को दो न्यायिक अधिकारियों और 40 सहायक कर्मचारियों के पदों को मंजूरी देने के साथ फैमिली कोर्ट की स्थापना के लिए जरूरी नोटिफिकेशन जारी करना है। सुनवाई के दौरान वकील कंवर पहल सिंह ने कहा कि चंडीगढ़ जिला अदालत अब भी फैमिली कोर्ट के नोटिफिकेशन का इंतजार कर रही है। वहीं हाईकोर्ट ने भी माना कि यूटी चंडीगढ़ में फैमिली कोर्ट का न होना गंभीर मुद्दा है। फैमिली कोर्ट्स एक्ट 14 सितंबर 1984 को शादी और पारिवारिक विवादों का जल्द निपटारा कराने और समझौते को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लागू किया गया था।