चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: चंडीगढ़ को देश के सबसे प्लान्ड शहरों में गिना जाता है। सेक्टर, चौड़ी सड़कें, हरियाली और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर इसकी पहचान हैं। लेकिन मंगलवार को सिर्फ दो घंटे की तेज बारिश ने शहर की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए। इस दौरान 72.4 मिमी बारिश हुई, जो इस मानसून सीजन में दो घंटे में हुई सबसे ज्यादा बारिश है। इसके बाद कई सड़कें पानी में डूब गईं, गाड़ियां फंस गईं और बाजारों व घरों में पानी भर गया।
सबसे ज्यादा असर सेक्टर 17, 22, 24, 36, 37, 42 और 43 में देखने को मिला। जन मार्ग, मध्य मार्ग, इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 और 2, हल्लोमाजरा और ओल्ड सेक्रेटेरिएट के आसपास भी तेजी से पानी भर गया। सेक्टर 22 जैसे व्यस्त बाजार में दुकानों और पार्किंग में पानी घुस गया। कई जगह लोगों को फ्लेक्स बोर्ड, पोछे और कपड़ों की मदद से दुकानों में पानी आने से रोकना पड़ा। सड़कों पर घुटनों तक पानी भरने से गाड़ियां और दोपहिया वाहन भी फंस गए।
बारिश के दौरान ट्रैफिक व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हुई। मध्य मार्ग पर पीजीआईएमईआर जा रही एंबुलेंस के फंसने की भी खबर सामने आई। ट्रांसपोर्ट लाइट प्वाइंट से आईएएफ म्यूजियम लाइट प्वाइंट के बीच पुलिस की मौजूदगी कम होने की शिकायत लोगों ने की। कुछ जगह बैरिकेड लगाए गए, लेकिन लोगों का कहना था कि ट्रैफिक डायवर्ट करने या दूसरे रास्ते बताने के लिए मौके पर पर्याप्त मदद नहीं मिली। इसी बीच मध्य मार्ग पर ट्रांसपोर्ट लाइट प्वाइंट और ग्रेन मार्केट चौक के बीच सड़क का एक हिस्सा धंस गया या बह गया, जिसके बाद पंचकूला से आने वाले ट्रैफिक को पुलिस लाइंस के पीछे से आईटीआई लाइट प्वाइंट की ओर डायवर्ट करना पड़ा। कई जगह पेड़ और उनकी टहनियां गिरने से भी रास्ते बंद हुए।
चंडीगढ़ में हर साल मानसून से पहले सड़क की नालियों और बारिश के पानी की निकासी वाली लाइनों की सफाई और गाद निकालने का काम किया जाता है, लेकिन इसके बावजूद वही जलभराव वाले इलाके बार-बार डूब रहे हैं। यही सबसे बड़ी चिंता है। सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक, चंडीगढ़ में सालाना औसतन करीब 1,009.8 मिमी बारिश होती है, जिसमें करीब 844.9 मिमी बारिश मानसून के दौरान होती है। ऐसे में शहर की ड्रेनेज व्यवस्था को तेज बारिश को कोई असामान्य घटना मानकर नहीं, बल्कि सामान्य मानसूनी स्थिति को ध्यान में रखकर तैयार करने की जरूरत है।