चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: चंडीगढ़ नगर निगम के ₹116 करोड़ के घोटाले में गिरफ्तार आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (IDFC First Bank) के मैनेजर रिभव ऋषि की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। अब लंदन निवासी एक अनिवासी भारतीय (NRI) महिला ने ऋषि पर उनके बैंक खाते से ₹1 करोड़ गबन करने का गंभीर आरोप लगाते हुए एसएसपी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई है।
शिकायतकर्ता 77 वर्षीय तरनजीत कौर बैंस ने बताया कि साल 2020 में वे अपने पति के साथ चंडीगढ़ के सेक्टर 21 स्थित अपना घर बेचने आई थीं। इसी दौरान उनकी मुलाकात आरोपी के पिता से हुई, जिनके माध्यम से वे रिभव ऋषि के संपर्क में आए। ऋषि ने उन्हें बेहतर रिटर्न का झांसा देकर आईडीएफसी बैंक की सेक्टर 22-बी शाखा में एनआरआई खाते खुलवाए। कोविड महामारी के कारण उन्हें वापस यूके लौटना पड़ा, जिसके बाद रिभव और अन्य बैंक कर्मियों ने उनसे संपर्क बनाए रखा।
आरोप है कि ऋषि ने दंपति को लुभावने निवेश और आईपीओ (IPO) योजनाओं का लालच दिया। उसने भरोसा दिलाया कि फंड का ट्रांसफर बैंक के आंतरिक सिस्टम के जरिए होगा और इसके लिए किसी अतिरिक्त दस्तावेज़ की जरूरत नहीं पड़ेगी। बैंस के अनुसार, उन्होंने अधिकारियों पर भरोसा किया, लेकिन जब जनवरी 2025 में उन्होंने ₹1 करोड़ अपने यूके के खाते में ट्रांसफर करने को कहा, तो ऋषि टालमटोल करने लगा। मई 2025 तक झूठे आश्वासन देने के बाद हकीकत सामने आई।
जांच में पता चला कि उनके खाते से पैसा रिभव ऋषि की पत्नी दिव्या अरोड़ा के खाते और 'कैपको फिनटेक सर्विसेज' जैसी संस्थाओं में ट्रांसफर किया गया था। पीड़िता को बैंक से कुछ ईमेल भी मिले, जिसमें नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज शिकायत के कारण उनके खाते को फ्रीज किए जाने की बात कही गई थी। बैंस ने आरोप लगाया है कि यह उनके फंड का अनधिकृत डायवर्जन था। फिलहाल पुलिस इस नए मामले की जांच कर रही है और घोटाले की परतों को खंगालने में जुटी है।