चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: चंडीगढ़ के मौजूदा ट्रैफिक संकट पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद मनीष तिवारी ने भविष्य की चुनौतियों को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मंगलवार को कहा कि यदि आज ट्रैफिक का यह हाल है, तो 2036 तक स्थिति कितनी भयावह हो सकती है। तिवारी ने चंडीगढ़, मोहाली, पंचकुला और न्यू चंडीगढ़ के लिए प्रस्तावित मास रैपिड ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट (MRTS) को केवल कनेक्टिविटी का माध्यम नहीं, बल्कि इस क्षेत्र की आर्थिक क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाला एक 'मर्केंटाइल मल्टीप्लायर' बताया।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी राय साझा करते हुए मनीष तिवारी ने उन आशंकाओं को सिरे से खारिज कर दिया कि मेट्रो आने से चंडीगढ़ में बाहरी लोगों की भीड़ बढ़ जाएगी। उन्होंने इस डर को 'सिजोफ्रेनिक' (भ्रमपूर्ण) करार देते हुए कहा कि आज असली आर्थिक विकास चंडीगढ़ की सीमाओं (पेरिफेरी) पर हो रहा है। उन्होंने भविष्यवाणी की कि अगले 5 वर्षों में लोग काम के लिए चंडीगढ़ से बाहर के इलाकों की यात्रा करेंगे, न कि इसके विपरीत।
तिवारी ने इस क्षेत्र की भौगोलिक और आर्थिक सीमाओं की ओर इशारा करते हुए तर्क दिया कि पश्चिमी सीमा बंद होने के कारण यहाँ कृषि, भारी उद्योग और सेवा क्षेत्र सीमित हैं। ऐसे में मेट्रो प्रोजेक्ट इन 'क्वाड सिटीज' (चार शहरों) को अमेरिका के 'रिसर्च ट्रायंगल' (रैले, डरहम और चैपल हिल) की तर्ज पर एक प्रमुख अनुसंधान केंद्र में बदल सकता है। उन्होंने इसे फ्रंटियर टेक्नोलॉजी और चौथी औद्योगिक क्रांति का केंद्र बनाने की वकालत की।
अंत में उन्होंने पंजाब, हरियाणा और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ प्रशासन को स्पष्ट संदेश दिया। तिवारी ने कहा कि यदि पंजाब और हरियाणा चंडीगढ़ पर अपनी राजधानी के रूप में दावा करते हैं, तो उन्हें अपनी बातों को अमल में लाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि तीनों पक्षों को मिलकर 'राइट्स' (RITES) द्वारा व्यवहार्य बताए गए इस मेट्रो प्रोजेक्ट की फंडिंग और इसे धरातल पर उतारने के लिए निवेश करना चाहिए ताकि इन चारों शहरों को एक निर्बाध महानगरीय क्षेत्र के रूप में जोड़ा जा सके।