चंडीगढ़ न्यूज डेस्क: नगर निगम ने चंडीगढ़ के व्यापारियों को एक बड़ी सौगात देते हुए फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट (FSC) जारी करने की प्रक्रिया को प्रॉपर्टी टैक्स से अलग कर दिया है। अब किसी भी कमर्शियल बिल्डिंग के लिए फायर एनओसी या उसके नवीनीकरण (Renewal) के लिए प्रॉपर्टी टैक्स की रसीद दिखाना या उसका सत्यापन कराना अनिवार्य नहीं होगा।
इस फैसले का सबसे बड़ा लाभ उन संपत्तियों को मिलेगा जो नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के मामलों में फंसी हुई थीं या जिनके टैक्स बकाया होने के कारण फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट रुके हुए थे।
नियमों में मुख्य बदलाव और निर्देश:
SOP में संशोधन: 13 सितंबर 2019 की स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) से प्रॉपर्टी टैक्स वेरिफिकेशन की शर्त को आधिकारिक तौर पर हटा दिया गया है।
केवल सुरक्षा पर ध्यान: फायर स्टेशन अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सर्टिफिकेट जारी करते समय उनका पूरा ध्यान केवल फायर सेफ्टी मानकों के अनुपालन पर होना चाहिए, न कि टैक्स के भुगतान पर।
पेंडिंग केस होंगे क्लियर: जिन मामलों में एफएससी केवल टैक्स कारणों से पेंडिंग थे, उन्हें अब मानकों की जांच के बाद तुरंत प्रोसेस किया जाएगा।
टैक्स वसूली जारी रहेगी: नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि राहत का मतलब टैक्स माफी नहीं है। सहायक कलेक्टर (टैक्स) को निर्देश दिए गए हैं कि वे डिफाल्टर्स से टैक्स वसूली की कार्यवाही अलग से और तेजी से जारी रखें।
व्यापारिक संगठनों ने किया स्वागत:
चंडीगढ़ बिजनेस काउंसिल (CBC) के अध्यक्ष अजय गुप्ता ने इस निर्णय को 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' की दिशा में एक बड़ा सुधार बताया है। काउंसिल का मानना है कि इससे प्रक्रियात्मक जटिलताएं कम होंगी और सुरक्षा मानकों को लागू करना अधिक सुगम हो जाएगा। इस सुधार के लिए काउंसिल की टीम लंबे समय से प्रशासन के साथ संपर्क में थी।